"जय श्री कृष्ण"
द्वारिका है श्री कृष्ण नगरी।
नगर में कृष्ण की यादें घूमीं।
कृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं।
हर तम के बीच मे वह दीप हैं।
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शृंगार छंद "तड़प"
सजन मत प्यास अधूरी छोड़।
नहीं कोमल मन मेरा तोड़।।
बहुत ही तड़पी करके याद।
सुनो अब तो तुम अंतर्नाद।।
सदा तारे गिन का read more >>
कौन कहता है कि मां सिर्फ धरती पर हो तब साथ होती है.....
हमारी पहचान उसके संस्कारों से होती है.....
उसकी आवाज हमारे दिलो में धड़कनों को तरह हो� read more >>
शिला पर नाम लिखा किसी ने कविता,अधुरा छोड़ दिया जो गुजरी मैं उस राह से , फिर लौटकर आना होगा वापिस इस मुकाम पर कहकर,शीर्ष मैंने पूरा किया,,। read more >>
ज्योति और राजेश की शादीशुदा जीवन अच्छे से बीत रही थी, पर राजेश की मां को ज्योति फूटी आंख नहीं भाती थी। वह बात - बात पे ज्योति को नीचा दिखा read more >>