हर बार ये दिल तुझसे हार जाता है, समझाऊ कितना भी न ये समझना जनता है
तेरी जो लगी लग गई है, ना ये तुझे भूलना चाहता है
बेकरारी दिल की बढ़ जाती read more >>
तुमने मुझे..खो दिया...
ठीक वैसे ही..जैसे 'बसंत' में
'पेड़'..खो देता हैं 'पत्तों' का साथ...
या वैसे..जैसे रह जाता है..
एक 'बूंद' तन्हा...'शाखों' पर
'ब� read more >>
बरवै छंद "शिव स्तुति"
सदा सजे शीतल शशि, इनके माथ।
सुरसरिता सर सोहे, ऐसो नाथ।।
सुचिता से सेवत सब, है संसार।
हे शिव शंकर संकट, सब संहा read more >>
पादाकुलक छंद "राम महिमा"
सीता राम हृदय से बोलें।
सरस सुधा जीवन में घोलें।।
राम रसायन धारण कर लें।
भवसागर के संकट हर लें।।
आज समा� read more >>
जिंदगी जीते -जीते आज हम कहां खड़े हुए
कोई खुशी नहीं है ,आज हम वहां खड़े हुए
वक्त की रफ्तार में,हम भी तेजी से बढ़ गए
पर वक्त ठहरा नहीं ,पर ह read more >>