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घर से निकले तो कुछ लोग मिले कोई गली मिली एक शहर मिला बुझा हुआ उनसे मिले तो ये अहसास हुआ सब लोग अंदर से मरे हुए शहर मिला बुझा हुआ जहा ल� read more >>
हर बार ये दिल तुझसे हार जाता है, समझाऊ कितना भी न ये समझना जनता है तेरी जो लगी लग गई है, ना ये तुझे भूलना चाहता है बेकरारी दिल की बढ़ जाती read more >>
तुमने मुझे..खो दिया... ठीक वैसे ही..जैसे 'बसंत' में 'पेड़'..खो देता हैं 'पत्तों' का साथ... या वैसे..जैसे रह जाता है.. एक 'बूंद' तन्हा...'शाखों' पर 'ब� read more >>
तू हवा के झोका बन छू बदन चला जाता मैं टक टकी लगाए देखता रहा तू सब उडा ले गया मेरी यादें कुछ वादे कसमे रस्मे तो उलझे सुलझे अजनबी जज� read more >>
बक्त बे रहम जित गया हार गई फिर जिंदगी काल रूपी पिशाचनी ने छीन ली मेरी हर ख़ुशी पहले भावनाएँ अब छीन लिया जज्बात भी इस जिस्म का मैं क्य� read more >>
कविता -काले बादल मौसम बरसात की चांदनी रात थी चमकते तारों में सजी धजी चांद की क्या बात थी, देख रहा था मैं उसे उसके चमकते शान को गरिमा औ read more >>
कविता -विश्वास और भरोसा पहाड़ों के बीच टेढ़ी मेढ़ी रस्ते पर बस चल रही थी जीवन की रेखा सी रस्ते पर ऊपर नीचे चढ़ रही थी सीधे रस्ते पर च� read more >>
कविता -विश्वास पत्थर तो पत्थर दिल सा मुलायम कहां! किन्तु! पत्थर दिल भी मुलायम होता वहां तो! बेजान कठोर कर्कश ठोकरें देने वाले पत्थर read more >>
मेरा दिल गया, मेरी जा गयी मेरा दिल गया ,मेरी जा गयी मैं हो तुझपे कुर्बा कुर्बा-कुर्बा कुर्बा गयी मैं हो तुझपे कुर्बा कुर्बा- कुर्बा � read more >>
स्वछंद आसमां ए कलम कुछ लिख दे ऐसा जो मानव को सबक सिखाये धरती को तो बाँट लिया है आसमां ही बच जाए मानव की तो मति बड़ी है भव क� read more >>
तेरी चौखट पर आ गये हैं, हमको ना मां विसारना, तूझसे ही आस हैं, विश्वास ना तोड़ना। read more >>
ज़िन्दगी में जब पूरी दुनिया खिलाफ हो ,तब आप को खुद पे यकीन है और ऊपर वाले में यकीन है तो आज नहीं तो कल आप को वो मंजिल मिल ही जाएगी . read more >>
इंसान के हाथों में कुछ नहीं, सब कीस्मत के हाथ है, बिगड़ना संवरना सब ऊपर वाले के हाथ है। read more >>
बरवै छंद "शिव स्तुति" सदा सजे शीतल शशि, इनके माथ। सुरसरिता सर सोहे, ऐसो नाथ।। सुचिता से सेवत सब, है संसार। हे शिव शंकर संकट, सब संहा read more >>
पादाकुलक छंद "राम महिमा" सीता राम हृदय से बोलें। सरस सुधा जीवन में घोलें।। राम रसायन धारण कर लें। भवसागर के संकट हर लें।। आज समा� read more >>
दो - सवाल ही तो तुमसे किये थे उन के आधार पे तुमने तो हमारी जिंदगी ही बदल दी क्या पता था था ये चंद सवाल हमको तन्हा ही कर जायेंगे यूँ हमारे read more >>
देती ही रही है झल्क वन्दना, अनुन्य व्यथा के चरणों से! शाशन का है ईक बोल अविध, अनुशाशन के पन्नों पे!! ये अनुशाशन ईक धार श्रृंखल read more >>
जाने कहां वो दिन गए हम इस जहां में कहां खो गए घड़ियां मिलन की कब बन गई , दूरियां हमको इसकी खबर भी नहीं आती है मुझको वो लम्हें याद जिसको read more >>
रिश्तों के धागे में एकबार गांठ पड़ जाए, तो दुश्मन उस पे निगाहें गड़ाएं रखते हैं मौका मिला की नहीं , बस निशाना लगा देते हैं। read more >>
जिंदगी में हम जो चाहते हैं वो जरूरी नहीं है कि हमें वो मिल ही जाए कभी -कभी किसी दूसरे की खुशी हमारी जिदंगी बन जाती है ।। धन्यव read more >>
है धरती पर नाज़ पिता, संघर्षों कि आवाज़ पिता! पुरूष कर्म इक नाम पिता का, सन्तान कर्म पर साज़ पिता!! है धरती कि महा धरा पर, read more >>
शीर्षक (आम) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) आम फलों का राजा है। ये सबके मन को भाता है। ये सबके मन को ललचाता है। इसे खाये बिना नहीं रहा जात read more >>
हर शाम तेरे इंतजार में चौखट पे बैठ तेरी राह तकती कब आओगे यही सोचकर मेरी आंख भर जाती काश! ओ दिन भी आए कहीं किसी रोज हम मिल जाएं विरहा � read more >>
जिंदगी जीते -जीते आज हम कहां खड़े हुए कोई खुशी नहीं है ,आज हम वहां खड़े हुए वक्त की रफ्तार में,हम भी तेजी से बढ़ गए पर वक्त ठहरा नहीं ,पर ह read more >>
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