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तुम जिंदा हो बस यही काफी है जो मर गए है।उसने कौन सा इतिहास लिख रखा है। read more >>
बहुत तकलीफ में हूं जहां जाता हूं बही जिदंगी मुंह मोर लेती है। read more >>
दुनिया में मोहब्बत ही एक ऐसा रोग है।जो हर बंदा को उस रोग की चाहत होती है। read more >>
हक बात बोलो बेटा तुम जिस रास्ते पर चल रहे हो उसी रास्ते पर चलो,भले ही पूरी दुनिया तुम से बगावत ही क्यों न कर ले। read more >>
जिंदगी खत्म नहीं होती है शाहब।जिसे जिंदगी मिल गई है उसे ही खत्म होना पड़ता है। read more >>
क्या चाहिए तुझे बोल तो सही मैं जिंदगी गिरवी नहीं रख दी तो कहना। read more >>
कितने ही ख़त लिखती हूँ ,मैं,हर, रोज, जिन्दगी के नाम,। तुम सोचते हो,ये यूं ही चल रही है,मेरे साथ,।। कविता पेटशाली 💌✍️❤️💓💗💝❤️♥️❣️💜💝 read more >>
मन के पंछी बिछड़ जाए तो, जीना मुश्किल होता है। आंखों में आंसू आए तो, पीना मुश्किल होता है। कैसा है दुर्योग यहां पर, कैसे मैं सह पाऊंगा त� read more >>
मेरे पहले कि दास्तान, अब बदली सी लगने लगी हैं। जिस शाम तन्हाई सताती, वह फूलों से महकने लगी हैं। जहाँ अकेले तारे गिनना मुश्किल था, अब यह read more >>
चाहत को मिलें आशां कि किरण, ज्यों मिलें प्रभा से अंधकार! त्यों ज्ञान ल्लक से मिलती हैं, होता कल्याण का सृजनहार!! हे! राम – राम, ह read more >>
मूड ऑफ ही रहता है शाहब,क्योंकि शुकून ढूंढ़ता हूं तो वेचैनी बढ़ जाती है। read more >>
दोस्त मोसीबत में दुनिया स्वाद लेती है। लेकिन तरक्की करोगे तो हेट मिलेगी। read more >>
दो दान दया का दया निधे:, हम शान आपका गाऐंगें! दो ज्ञान अचल हे! महा ऋषी, गुणगाण आपका गाऐंगें!! है दया धर्म का मान रहा, भक्ती - read more >>
मोहब्बत गिरवी रख कर वफा ढूंढ रहे है लोग। read more >>
किस दोस्ती की बात करते है लोग,जब मोहब्बत बिक सकती है तो दोस्त क्यों नही। read more >>
सब एक दूसरे के बुराई में लगा हुआ है,लेकिन अपने किरदार के दाग को छुपाए हुए है। read more >>
दिल बार - बार तुझसे यही इल्तिज़ा करे दूर जाना हमसे ,पर अपने दिल में पनाह हमें ही देना। धन्यवाद read more >>
बड़ी मुश्किल से दामन बचाकर आया तेरे पास मिला न तुम मुझे ,मिली हमे मौत read more >>
कविता- लक्ष्य भेद चाहे बनी हो दीवारें लोहे की, जो हो चाहे अकाट्य अभेद। मेरी प्रतिज्ञा दृढ़ संकल्पित है, एक दिन करूंगा लक्ष्य भेद।। � read more >>
कविता का शीर्षक- गुरु ज्ञान का सागर वंदन है मेरे गुरु का, अभिनंदन है गुरु का। गुरु ज्ञान का सागर, वाणी चंदन है गुरु का।। भवसागर पार कर� read more >>
कविता का शीर्षक- सावन सुन्दरी आ गया सावन का मधुमास पल, नारी की लहराने लगी हरित चुनरी। सज-धज कर सोलह श्रृंगार करके, मन-मगन नाच रही सावन � read more >>
मदद करने के लिए बोलो तो कोई नही करता है।लेकिन पहचान दिलाने के लिए कह दो तो पूरा खानदान का कॉलिटी बताने लगता है। read more >>
शीर्षक (अभी बाकी है) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) सांसे रुकने को है,पर कुछ काम अभी बाकी है। यमराज से बोल देना थोड़ा रुक कर आये। क्योंकि read more >>
मैं आंखों से कुछ बोलूं क्या कुछ गम को हल्का कर लूं क्या तुम नैनों की भाषा पढ़ लेना मन ही मन सब समझ लेना मैं कहने में कुछ असमर्थ सही तु read more >>
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