((((((वास्तिवकता))))))))
हम वो कवि नहीं जो कल्पना में खो जाते है,
हम वो कवि है वास्तिवकता का दर्शन करवाते है,
सूर्य की तपन बादलो के बौछार कड़कत read more >>
((युवा और बुजुर्ग))
झुर्रियां चेहरे पर था हम आईना बदलते रहे,
सत्य को जानकर भी झूठ पर चलते रहे,
युवा और बुजुर्गों में हमेशा से टकराव है ,
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जब दर्द तुम्हें होता है ...!
तो आंसू मेरे निकलते हैं!!!
जब उदास तुम होते हो..!
तो दुनियां मेरी विरान होती है!!
जब परेशान तुम होते हो..!
तो बेच� read more >>
बस, वह तो ऐसा ही है।
कहते बुझारत लोगों को, बहुत सुना है।
लोगों ने उसमें क्या देखा, क्या चुना है? लोगों ने उसे खुद भूना, या वह खुद भुना है?
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