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कुछ सुकून के पल मिले यह किसकी चाहत नहीं होती है परंतु तूफानों से लड़ने का आनंद मैं एक अलग तरह का अपना अंदाज होता है स्वरचित लेखिका पू� read more >>
दुआ है- हे पीहर की तू है राजदुलारी! तुम्हारी यादों का- यह मेला रह-रह के गुजरता है! हंसी और रूठने- मनाने का हर सिल-सिला! तुम ही तो थी घर- � read more >>
ऋतुराज- जो आए हैं, बारह मास के बाद। बहकती- चली बसंती बयार, ओढ़ के पीली चुनरिया।। खिल रहें- ये सरसों के फूल, खुशबू बिखेरने लगीं हैं। ख read more >>
राहगीर मैं आया हूं, सुर साथ लाया हूं हवा छेड़ेगी हर साज, मौसमें बहार गाऊंगा बसंती बयार में फागुन के राग -मोती read more >>
उनकी मोहब्बत की मेहफिल मे, मेरे ख्वाब का बसेरा है, और कोई मंजूर नही है उसे, केहता है, उनकी चाहत पे बस हक हमारा है ✍✍💞💞👌🏾👌🏾 राधे- राधे read more >>
क्षितिज क्षितिज से पूछती हूं मैं कहीं दिलबर मेरा देखा जो था अनमोल दिल का हीरा तराशा था जिसने शिद्दत से दिया पत्थर को मुकम्म� read more >>
क्षितिज क्षितिज से पूछती हूं मैं , कहीं दिलबर मेरा देखा । जो था अनमोल दिल का हीरा , तराशा था जिसने शिद्दत से । दिया पत्थर को मुक� read more >>
कविता -कलयुग की कली कली, अधखिली सोंच में थी पड़ी, तरुणा में करुणा लिए क्रंदन का विषपान पिए रति छवि का श्रृंगार किए मन में ली वह व्य� read more >>
बीत गया वो वक्त जब इश्क को खुदा की अमानत, समजकर अपनी मोहब्बत को बया करते थें ! आज कल की पिढी का तो कूछ और हीं चल रहा है , दिलं से दिलं तक नह read more >>
आजा चंदा तुझे बुलाऊं, मुन्ने को मैं कैसे समझाऊँ । मुन्ना मुझसे रूठ गया है, कैसे मुन्ने को मैं मनाऊँ । अब तो उसको तुम्हीं मनाओ, मुन्� read more >>
★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★ *प्रेरक कहानी* ★★★*पांच घंटियाँ*★★★ 🔔🔔🔔🔔🔔🔔 प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..... करण सिंह ★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■ read more >>
*फूलों की व्यथा* इस बगिया का एक है माली अलग अलग है क्यारी रंग बिरंगे फूलों से सजी ये लगती प्यारी प्यारी।। मनमोहक फूलों की गंध से मह� read more >>
आजा चंदा तुझे बुलाऊं, मुन्ने को कैसे समझाऊँ । मुन्ना मुझसे रूठ गया है, मुन्ने को मैं कैसे मनाऊँ । चंदा अब तो तुम्हीं बताओ , मुन्ने को अ� read more >>
नारी है दुनिया की धरनी, नारी ही तो जग की जननी। नारी है तो दुनिया होगी, नारी बिन दुनिया न होगी। नारी का न करो अपमान, नारी से ही दुनिया महा read more >>
नारी है दुनिया की धरनी, नारी ही तो जग की जननी। नारी है तो दुनिया होगी, नारी बिन दुनिया न होगी। नारी का न करो अपमान, नारी से ही दुनिया महा read more >>
सखी रे चल रे चल ! कोयलिया- गाती तो होगी, फाग सुनाती तो होगी। फागुन की- मस्त बयारों में बहकते गाते, सखी रे चल रे चल। नदिया के पार- आम की � read more >>
पीयू-पीयू बोले दिल ये पपीहा नदिया के तीरे बंसी जो बोले, पीयू-पीयू दिल ये पुकारे आओ सखी- हम देखन को चलें, बंसी बजैया मोरे पिया- कृष्ण म� read more >>
⭐ कविता = ( खादी ) एक खुदा के हम सारे बंदे ! धर्म की आड़ में खुल गए धंधे !! खेल रहे हैं खेल यह गंदे ! अवाम में हो गए सारे नंगे !! कुर्बानियों से � read more >>
दोहा :- मन घुवत कतैहि जैहे,काल हट पछताहे! माया अन्त ईश्वर की, सद कर्म फल खाये !! व्याख्या:- सांसारिकता जीवन मैं मनुष्य का मन बार-बा read more >>
सपनों की लाली ! आंखें चार हुई थी, मुलाकात खूब हुई थी- जो जुबान से कह ना पाए, सोचा था- एक लाल गुलाब दूंगा लाल बाग से चुन लाऊंगा, भेंट करूं read more >>
दोहा :- मन घुवत कतैहि जैहे,काल हट पछताहे! माया अन्त ईश्वर की, सद कर्म फल खाये !! व्याख्या:- सांसारिकता जीवन मैं मनुष्य का मन बार-बा read more >>
तुम्हें उड़ता फूलों पे देख उर में उठते प्रशन अनेक फूलों के कानों में कुछ कह जाती हो या फिर प्यार भरा चुंबन उनको दे जाती हो फिर झूम उठत read more >>
जिथे मन भयरहित असते आणि जिथे ज्ञान मुक्त असते तिथे डोके उंच असते. अरुंद घरगुती भिंतींमुळे जगाचे तुकडे झालेले नाहीत, हे सत्यातून आलेल� read more >>
कॉलेज चा पहिला दिवस मन घाबरत होते डोके मात्र वेगवेगळ्या विचाराने साचले होते कॉलेज मध्ये पाय ठेवता क्षणी तिचा चेहरा दिसला read more >>
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