हम नमी ( भीगने) से क्या डरने लगे...
बारिश हमे डरा रही थी.......
पर वो शायद भूल गई की बारिशों से
तो अपनी पुरानी यारी थी........
पर जिल्लत तो तब हुई, ज� read more >>
हम नमी ( भीगने) से क्या डरने लगे...
बारिश हमे डरा रही थी.......
पर वो शायद भूल गई की बारिशों से
तो अपनी पुरानी यारी थी........
पर जिल्लत तो तब हुई, ज� read more >>
ख़ुदकी चाहत मे, खुदके भी ना रहे
इतनी हद से चाहत की -की,मरहम भी न मिल सके
शिकायत क्या करे किसी से, उस लायक भी न रहे
घुटन भरी परी है जिन्दगी, read more >>
कविता- मुहब्बत है गांव में!
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी-25/01/2023
माना कि थोडी सी गुरबत है गांव में।
शर्म है, रोटी है, मुहब्बत है गांव में।
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