नमस्ते दोस्तों 🙏🙏
दोस्तों ! आज की कहानी का शीर्षक है ....
" पवित्र मनोवृति " !
कहते हैं जिसकी सोच पवित्र हो वो अगर मजबूरी में गलत काम भी क� read more >>
कली को स्वतः स्वच्छंद,
ज़रा खिलने दो।
खुद को खुद से,
ज़रा मिलने दो।
जो जैसा है, वैसा,
ज़रा बनने दो।
मन को मन की,
ज़रा सुनने दो।
तोड़ो, मर� read more >>
किया जो विश्वास तूने अपनों पर बस धोखा ही तो खाया है ,
फिर क्यों तू इतना इतराया है, इसने घर-घर को जलाया ,
रिश्तो ने दे कर दुहाई हर अपने को लू read more >>
एक शाम, खाली सी एक शाम,
जब अंधेरा छाया, मन में छाए उदासी का रंग।
रात के संग, सन्नाटे में ढूंढे,
कुछ सहारा, कुछ रोशनी, कुछ अपने सपनों के रंग read more >>