कुछ देर तो बैठो मेरे पास कहने को कुछ भी नहीं है पर कुछ तो बोलो मेरे साथ सुनो कुछ ऐसा बोलो जिससे मन का दर्द भी कम हो जाए शब्दों के घाव भी मि read more >>
प्रिय!
इन बदलती हवाओं के रुख के!
साथ मैं भी कुछ बदलती जा रही हूं!
मैं भी समय के साथ कदम! मिलाकर कुछ दूर चलती जा रहा हूं !
पर यह न सोचना यह स� read more >>
कविता = ( दिल्ली )
अंधी मूकबधिर अब हो गई दिल्ली !
दिल्ली का यह क्या हाल हो गया !!
असहाय, बेबस पिता लाचार हो गया !
पिता के ही सामने बेटा लाश ह read more >>
फिर कैसे मेरा भारत महान
100 में 99 है बईमान...
सच बताओ देशवासियों क्या
यही रह गई है हम सब की पहचान,
वैसे तो हर शख्स देता है,
भ्रष्टाचार के ख� read more >>
"खोई सी-
भागती-दौड़ती,
ज़िंदगी में यह व़क्त की"!
"नज़ाकत है जनाब-
मैंने मंज़िल को पाने,
का वादा ख़ुद से किया है"!!
"और इरादा भी है तो,
कश्� read more >>