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तुम तो बहुत बेवफ़ा निकले , मेरी जिंदगी से ख़फ़ा निकले , तुम्हें याद करके दिन _ रात सनम____ आंसू मेरे कई दफ़ा निकले । शिव किशोर ,शाहजहांपुर read more >>
जिंदगी जिंदगी एक सफर मुश्किल है सबकी डगर इम्तेहान जीवन की सच्चाई है बगैर परिक्षा जीने में कठिनाई है। इम्तेहान से ना घबराना परिणाम � read more >>
याद आयेंगे वो हर पल , जो तेरे साथ गुजारे कल , बर्दास्त न होगी तेरी ज़ुदाई___ याद कर _ कर जीवन जायेगा ढल । __ शिव किशोर ,शाहजहांपुर , यूपी read more >>
सुनो, जो तस्वीर बनाई है, अपने जहन में मेरी .... तुमने उसको सभांल कर रखना.... उसमें पल- पल बदलती सूरत दिखती है, मेरी..... read more >>
हमसफ़र कदर करने वाला चाहिए, हो थोड़ा कम स्मार्ट, प्यार करने वाला चाहिए। read more >>
हमसफ़र ऐसा हो जो बिना कहे समझ जाये, दिल से दिल की बात समझ जाये, शब्दों में ना हो वया, आंखों की भाषा समझ जाये। read more >>
ना पैसों की भूख हैं हमें, ना दौलत की चाह हमें, मिल जाये थोड़ा सम्मान, ना सोना चांदी की चाह हमें। read more >>
प्यार बांटने बाला कोई नही है। लेकिन नफरत का अंगार सभी के दिलों में जलती है। read more >>
प्यार मन का होता है, जो हर पल दिल के गरीब होता हैं, दूर रहकर भी पास होता हैं, दिल से दिल का कनेक्शन होता हैं। read more >>
"अधूरापन" "कुछ चीजें अधूरी ही अच्छी लगती है,वो चाहे प्रेम हो,या सफर हो,या बातें या फिर सपने,ये अधूरे ही अच्छे लगते हैं,क्योंकि इनकी यादे� read more >>
प्यारी होती हैं बेटियां, घर आगन का फूल होती हैं बेटियां, करती हैं मीठी मीठी बातें, सबके चेहरे पर मुस्कान लाती हैं बेटियां, हंसती हैं � read more >>
आज का काम, कल पर क्यों छोड़ दूं , मेरा वक्त आने वाला है उसे दो पल के आलस से क्यों रोक दूँ...।। read more >>
जिंदगी का सबक, वक्त से सीखा हमने, अपना कमाओ, अपना खाओ, दूसरों के पैसों पर निर्भर मत रहना। read more >>
बूंद बूंद से घड़ा भरता है, बूंद बूंद से सागर, मेंहनत का एक एक रुपया जोड़िये, भर जायेगी गागर। read more >>
(दोहा छंद) टूटे बांध विकास के,हुए नागरिक मूक। राम भरोसे चल रहा,दिखे नहीं निज चूक।। टूटे बांध विकास के,छाए बादल भ्रष्ट। जनता में अति छो read more >>
(दोहा छंद) बेटी है अनमोल अति,जिससे है संसार। धरा दिव्य गुलजार है,इनको भी दो प्यार।। मातु पिता की लाडली, बेटी है सौगात। इनको खुशियाँ दे read more >>
(दोहा छंद) उपजा मन अनुराग जो,किया याद सब नात। बातें करकर सुख मिला,हुआ कांत मय गात।। समय सुहाना अब हुआ, उपजा मन अनुराग। आती सुखकर अब निद read more >>
हाय, मैंने यह कब, क्या कर दिया? मैं तो मां बनाया था, सीने में इतना त्याग, किसने भर दिया? इतना सोचकर खुदा, ग़म खा गया, पन्नाधाय बनाने की, आग� read more >>
(दोहा छंद) खोया सपना में रहूं,मिले अत्यधिक हर्ष। करता सतत प्रयत्न मैं,प्राण करे उत्कर्ष।। अपना अपना ख्याल है, जीवन है संग्राम। सावधा read more >>
(दोहा छंद) दुर्गम करतब मैं करूं,बालाजी हैं साथ। करते संकट दूर सब,रखकर सिर पर हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर( read more >>
(मुक्तक छंद) कलाकार वो खूब,रहे जिसमें दृढ़ मस्ती। जाऊं उसमें डूब,मगर डूबे मत कस्ती। रखूं जिया में लाज,रहूं दुनिया में मिलके_ संगी दुश� read more >>
(दोहा छंद) सदा लक्ष्य हो प्रगति का,रखता हूं मैं ध्यान। करता अथक प्रयास मैं, बढ़ता मेरा ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिल� read more >>
(दोहा छंद) अड़चन बिन जिदगी नहीं, करें सामना आप। कामयाब होंगें सदा, मिले नहीं संताप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप� read more >>
(दोहा छंद) सुनकर मेरे शेर को, दे ताली सब लोग। हसी खुशी में झूमते,कानों से कर भोग।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द� read more >>
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