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(मुक्तक छंद) लोगों ने खुद से खुद के लिए कांटे दार तार लगा लिए। शिकवा_शिकायत कर खाली नफरत के ये सब बीज बो लिए। फिर भी ये सब लोग अनजान हैं म� read more >>
(मुक्तक छंद) समानता के नाम पर कुछ लोग धोखा दे रहा है। इसके पीछे सच्चाई का ही गला रेत रहा है। जो दरार थी ये ठग उसको और है बड़ा कर दिया_ भोल� read more >>
(दोहा छंद) बरसे सावन झूम के,लाया दिव्य निखार। पुरुष स्त्री सब सौम्य है, रग रग में है प्यार।। बरसे सावन झूम के,पानी में है जोश। भींग भीं� read more >>
(मुक्तक छंद) नेता बन के भाषण दे रहे हो वादा भी कर रहे हो। पहन के सफेद कुर्ता पजामा सबको ही लुभा रहे हो। मौसम के तरह बदल जाओगे यह सत्य अब स� read more >>
(दोहा छंद) रहें साफ दृढ़ वास्तविक, जिएं न्याय के साथ। कर खंडन अन्याय का, लें यश अपने हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस read more >>
(दोहा छंद) कुछ नव पाने के लिए, करें त्याग आराम। मंजिल पर रख ध्यान को,मिलता सत्य मुकाम।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त� read more >>
(दोहा छंद) मानव जीवन सत्य का, स्वच्छ प्यार का अंश। मनुज जन्म अनमोल है,सुरभित कर यह वंश।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्� read more >>
(दोहा छंद) यश अर्जित करना सदा, मेरा पहला काम। लोगों में भगवान हैं,दिखते सब में राम।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप� read more >>
(दोहा छंद) सदा लक्ष्य हो प्रगति का,रखता हूं मैं ध्यान। करता अथक प्रयास मैं, बढ़ता मेरा ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिल� read more >>
नन्हा पौधा लगाओ, ज़मीं को सजाओ, हरी भरी धरती, पेड़ पौधें लगाओ, बड़े होकर देंगे छाया, देते हैं फल, ऑक्सीजन, देते हैं जीवन दान, पर्यावरण क� read more >>
कहावत नही ये हकीकत है कि जो ताना मारते है नाकामी का बही लोग ओहदा देख कर दिखावे से ज्यादा भरवा गिरी करतें हैं। read more >>
बस बहुत हो गया भागम भाग अब कुछ देर ठहरना चाहती हूं थक चुकी हूं मां अब तेरे गोद में सोना चाहती हूं मां मुझे कहीं छुपा ले हो सके तो जमान� read more >>
हाल दिल का अपना सनम सुनाएं कैसे, नूर ए तन तुझ में नज़र समाएं कैसे। रात दिन तुम रहती हो पर छाई जैसे, तुम बिना अब दिल शीतल कि सम जिएं कैसे read more >>
मेरा देश महान है विश्व का मान है, अब के समय में खूब धनवान है। विभिन्नताओं में भी एकता है, अलग_अलग रंग_रूप भी है। यहां के लोगों में जज़� read more >>
(शायरी) बड़ी मुद्दत के बाद उन से मुलाकात हुई, उनके एक शब्द सुनते ही मन कुल्फी सा शीतल हो गया। फिर तो हसियों की लड़ी में बात चलते रहे, दोन read more >>
बरसात का महीना चल रहा था।बद्रीनाथ अपने दफ्तर से घर आए।देखा,जिस कमरे में वह रहते है, वहां एक कोने में पानी जमा हुआ था।थोड़ी देर पहले बरस� read more >>
घबराना नहीं मुश्किल में, रखना हिम्मत का साथ, टल जायेगी हर घड़ी, वक्त पर रखना विश्वास। read more >>
"नींद का सौदा"                        (गोपी की विरह व्यथा)           एक दिन वृंदावन की बाज़ार मैं खडी होकर एक सखी कुछ बेच रही है, लोग आते हैं पूछते हैं � read more >>
"ठाकुरजी की भाभी"  एक लडकी थी जो कृष्ण जी की अनन्य भक्त थी, बचपन से ही कृष्ण भगवान का भजन करती थी, भक्ति करती थी, भक्ति करते-करते बड़ी हो ग� read more >>
प्रभु राम जी की कृपा श्री अयोध्या जी में 'कनक भवन' एवं 'हनुमानगढ़ी' के बीच में एक आश्रम है जिसे 'बड़ी जगह' अथवा 'दशरथ महल' के नाम से जाना जा� read more >>
"मुरली"           किसी गांव में एक पुजारी अपने बेटे के साथ रहता था। पुजारी हर रोज ठाकुर जी और किशोरी जी की सेवा मन्दिर में बड़ी श्रद्धा भाव read more >>
प्रभु की लीला एक बार एक बहुत बड़े संत अपने एक शिष्य के साथ दिल्ली से वृंदावन को वापिस जा रहे थे , रास्ते में उनकी कार ख़राब हो गई । वही प� read more >>
*भक्त के कार्य* वृन्दावन में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह बाँकेबिहारी से असीम प्यार करता था। वह बाँकेबिहारी का इतना दीवाना था कि � read more >>
बांसुरी की धुन  हरीराम बनारस में गुलाब की पत्तियों को पीसकर गुलकंद बनाने का काम करता था। बनारस में उसकी गुलकन्द दूर - दूर तक मशहूर थी। read more >>
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