अब मैंने गुनाह करना छोड़ दिया ,
अब मैंने इश्क़ बेपनाह करना छोड़ दिया ,
वह निकलती है मेरे सामने से दिन में कई बार__
अब मैंने उसके ऊपर निगा� read more >>
(मुक्तक छंद)
कलकल चंचल जल दिखे, बांध हुआ है भग्न।
बरसे सावन झूम के,सभी नदी जलमग्न।
मस्त सरकार सो रहे,आनन फानन काम_
सड़कों का भी लय बुरा,ज� read more >>
(मुक्तक छंद)
समय सही यदि नित चले, मिटता कभी न शान।
समय बड़ा बलवान है,इनसे ही है मान।
रहे मनोबल दृढ़ सदा,साहस हो तब पास_
मुश्किल सब को पार � read more >>
"व़क्त ने व़क्त को कुछ ऐसे फेर दिए,
हम अपनों से ही सदा दूर हो गए"..!!
"हम रहे सदा ईंमान के अपनों में,
फिर भी हमें नज़र अंदाज़ कर गए"..!!
-मोती read more >>