"जब तक हम समझ पाते ए-जिंदगी,,
तब तक तू निकल जाता ए-जिंदगी"..!!
"तू ही सांसों में फिरता ए-जिंदगी,,
तुझ में छुपा ख़ुदा का नाम ए-जिंदगी"..!!
-मोती read more >>
(मुक्तक छंद)
एक दौड़ था जब गम का मतलब भी नहीं था पता।
हर गम तकलीफ़ खुशियों का ही है लगता था पता।
कर्तव्यों के बेड़ी तले अब कटते हैं दिन र� read more >>
मेरा दिल हर सितम सह लेता है जमाने का
न जाने क्यों ?
एक तुम्हारे सितम से दूर जाने
को जी चाहता है !
यह दिल है कि जमाने के दिए
कई गम दुनिया � read more >>
एक छोटे से गांव में एक बच्चा नामक 'रवि' रहता था। रवि बहुत आवारा और खुशनुमा बच्चा था, जो हमेशा सबकी मदद करने को तैयार रहता था। वह दूसरों के read more >>