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मोहब्बत करके देख लिया हमने प्यार कितना भी सच्चा क्यों ना हो। एक दिन साथ छोड़ ही देती है। read more >>
दुनिया में जिसकी जितनी समझ होगी वो उतना ही दूसरो को समझ पाएगा आप खुद के बारे में लोगो को समझा कर अपना वक़्त जाया ना करे जनाब - और सुनो सूरज read more >>
ज़रा सा दिल की बात कह देता हूँ, शायरी के रूप में यहां लिख देता हूँ। जब दर्द का सामना करना पड़े, ख़ुद को हंसते हुए बयाँ कर देता हूँ। इश्� read more >>
मेरे पैर में फटे व्यार किस्से मै सुनाऊ ना घर सुने ना सरकार सुने क्या घुट घुट के मर जाऊ इस महगई की दौड में ना पेट भरे ,ना खुश मेरे परिव� read more >>
तू धोखा है ये सबने कहा पर मैने ये सब इनकार किया। ये दर्द मुझे मिलना ही था मैने बेवफा से प्यार किया। केशव सिंह 📝 read more >>
हजारों दीप जल जाए तुम बस मुस्कुराना। निगाहें मेरी थम जाए तुम बस मुस्कुराना। दर्द जब भी बढ़े कि सीना चीर जाए हौसला उससे मिलने का कभी read more >>
हार हृदय की वही कहानी तुम ही तो कह जाते हो। साथ साथ मेरे आकर मुझको ही छल जाते हो। वही वेदना फिर उठ कर जीवन राग सुनाती है दिखा छलावा रूप read more >>
कविता- हे वेदों के अकाल पुरुष!तुम कौन हो? पद- श्रीहरि भक्ति पद। रस- भक्ति रस छन्द- मुक्तक (मुक्त छन्द) कविता- (१) तुम कैलाशी! तुम अविनाशी! read more >>
एकतरफा प्यार था मेरा ना कभी बता पाया ना कभी जता पाया। और न बो सक्स मेरा हो पाया। read more >>
तुमसे दूर हो कुछ भाता नहीं है। झिलमिल दिए बुझने लगे हैं मन में दीया जगमगाता नहीं है। कैसे मधुप ने नई राह चुन ली मुझमें धैर्य अब समाता � read more >>
तुमसे दूर हो कुछ भाता नहीं है। झिलमिल दिए बुझने लगे हैं मन में दीया जगमगाता नहीं है। कैसे मधुप ने नई राह चुन ली मुझमें धैर्य अब समाता � read more >>
(मुक्तक छंद) बीते दिन वनवास के, बहुत उठाए कष्ट। खुशी मिली तब राम को , दुष्टों का कर नष्ट। धर्म ध्वज का जय हुआ, खुशी अयोध्या धाम_ प्रजा उत् read more >>
सब रिश्तों को ढूंढ कर परखा है अपनी जज्बातों में पर मां के जैसी किसी को नही देखा केयर करने बाला। read more >>
(कथन) सर्वप्रथम तो रोटी ही आवश्यक है, उसके बाद कपड़ा और मकान। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
(कथन) विकास कि ऊंची उड़ान तो हम भरें हैं, लेकिन भूख की तड़प अभी भी यहां है। शिक्षा के अभाव में अभी भी कुछ दयनीय हैं। जो मानव समाज लिए घोर read more >>
(कथन) भूख की तड़प मिटाने के लिए शिक्षा जरुरी है, बिन शिक्षा ये तड़प बरकरार रह सकता है। भूख की तड़प अभी भी होना शर्म की बात है, कहीं तो पर� read more >>
(कथन) भूख की तड़प से बच्चे खतरनाक बन सकता है, समाज के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है। इसलिए कहीं भी भूख की तड़प सबके लिए शर्म है। इसके read more >>
(दोहा छंद) प्राण संघर्ष पूर्ण है, राह नहीं आसान। फिर भी बुलन्द हौसला, से मिलती पहचान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त� read more >>
(दोहा छंद) जीवन में हैं कष्ट नित, राह नहीं आसान। सुख दुख को है झेलना, तब मिलते हैं मान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती read more >>
(दोहा छंद) जन्म मरण के खेल का, राह नहीं आसान। मानव उत्तम योनियां,जिसमें भरे निदान ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप� read more >>
(दोहा छंद) मंजिल मिले तलाश से,राह नहीं आसान। रात दिवस बीते सदा, मिलते सिर्फ निशान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपु� read more >>
(दोहा छंद) जीवन जीना है कला, राह नहीं आसान। पग पग पर बाधा मिले, फिर भी बन इन्सान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(दे read more >>
तेरा जमाना है गोपाल प्यारे, सबके मन भाये कैन्हया दुलारे, गैया चराये,मुरली बजाये, सब करे‌ तुझसे प्यार सांवरे। read more >>
कितना सुन्दर रुप हैं घनश्याम का, दो गजराले नैना तिरछी नजरिया, मोर मुकुट कानों में कुण्डल, होंठों पर लाली हाथों में मुरलिया। जय श्री क� read more >>
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