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(दोहा छंद) अधरों की मुस्कान पर, दिल होता कुर्बान। उसको अपना जान कर, बना लिया हूं जान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती� read more >>
(दोहा छंद) अधरों की मुस्कान से, मन में होता हर्ष। मन करता कुछ भेंट दूं,करती है आकर्ष।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती� read more >>
(दोहा छंद) सुर्ख गाल पर तिल रहे, अधरों की मुस्कान। गोरी लगती गजब है, धरा धाम की आन।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर( read more >>
(दोहा छंद) अधरों की मुस्कान की, दिल से हूं कद्रदान। मन में देते चैन को, जैसे हो अभिमान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त read more >>
(दोहा छंद) अधरों की मुस्कान है, जीवन में वरदान। राहत मिलता है सदा, बढ़ता है तब मान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपु� read more >>
(मुक्तक छंद) अपने जज्बातों को मैं यहां अंकित कर रहा हूं। मोती जैसे अल्फाजों से दास्तान लिख रहा हूं। जिन्दगी सु:ख_दुःख का एक अद्भुत संग read more >>
(शेर) पग_पग पर इम्तिहान की लौ से गुजरना है, फिर भी मुस्कुराते हुए सबसे रूबरू हो रहा हूं। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त read more >>
साक्षात्कार डॉ पीयूष गोयल यह साक्षात्कार बिंदेश कुमार झा द्वारा लिया गया है। जो मूल रूप से एक लेखक हैं। यह वर्ष 2023 में जुलाई माह में म� read more >>
विधवा की आवाज़ काली रात छाती पर आवाज़ लगी, विधवा ने निहारा और विचलित हो गई। गहरी संध्या में उठा वीरान सा ध्वनि, उसकी माटी से निकली कु� read more >>
अबला नारी शक्तिहीन, अपराधीत और भयभीत, धीरे-धीरे संघर्षों में ही गुम हो जाती है। समाज की जालीम नज़रों से बच्ची, सपनों की दुनिया में उलझ� read more >>
किसी बुनकर के चरखे की तरह, चरखा विचारों का घूमता है, बुनता रहता वो रात दिन ये मन रूपी धागा। धागा, जो धागा-धागा करके, एक पर्दा बन जाता ह� read more >>
ऐसा क्यों मेरे साथ हुई, एक वहीं बात हुई। बिछड़े है तुमसे ये यार कैसे, कि फिर ना मुलाकात हुई। बिन सावन के आँखों से बरसात हुई, दिन के उज read more >>
बहकी हवाएं, सुलगा है मन, आगे क्या होगा माजरा। सितम की घड़ी है, या भरम है रे! बावरा।। मुहब्बत को कैसे कह दे हम, लगता है हमको खुद से डर। � read more >>
1. काली घटा का घमंड देखा रंग रूप एक जैसा आसमान को छूने चली है मकड़ी टूटा जाल बिखर गई कोशिश. 2. झूंड बना कर खड़ा इंसान झांक झांक कर देखता बाद� read more >>
1. काली घटा का घमंड देखा रंग रूप एक जैसा आसमान को छूने चली है मकड़ी टूटा जाल बिखर गई कोशिश. 2. झूंड बना कर खड़ा इंसान झांक झांक कर देखता बाद� read more >>
आ लौट चली आ घर अपने है कद्र नही जिस नारी को,पति के सारे अरमानों की वह हो ना सकती है नारी,बस सिवा मूर्ति अपमानों की हाथों में थामा हाथ सम read more >>
धर्म की व्याख्या करना कोई आसान काम नही है। जियो और जीने दो , स्वयं सुख से रहो और दूसरो को सुख से रहने दो बस यही समझने का आसान तरीका है। स� read more >>
(शायरी) पग_पग पर इम्तिहान की लौ से गुजरना है, फिर भी मुस्कुराते हुए सबसे रूबरू हो रहा हूं। एतिबार कर के भी छलने वाले मिल जाते हैं, तब से read more >>
(शायरी) कभी अपनों से तो कभी परायों से अनबन है, ऐसे हालात में लहू जिगर का पी रहा हूं। सोचता हूं जज़्बात सारे सकार हो ही जाए, परन्तु घात_प� read more >>
ना मैं मीरा ना मैं राधा, फिर भी हूं तेरी दीवानी, इतना सुन्दर रुप हैं तेरा, मैं देखूं बार बार बिहारी। read more >>
(शायरी) प्रार्थना भी बेकार साबित हो जाते हैं, कोशिश का दामन थामे बढते जा रहा हूं। मायूसी का आगमन जोर_शोर से होता है, कुछ शुद्ध आत्माओं � read more >>
तेरे इश्क में हम पागल हैं, पी लिया तेरे नाम का जाम, इस जग से अब बेगाने हैं। read more >>
मां का क्रोध है जग में सबसे न्यारा कुछ है अलबेला तो कुछ है नखराला मां है प्रेम का अंचल जिसने नो माह कांटे दुख कष्ट में क्या हम पर क्र read more >>
मां का क्रोध है जग में सबसे न्यारा कुछ है अलबेला तो कुछ है नखराला मां है प्रेम का अंचल जिसने नो माह कांटे दुख कष्ट में क्या हम पर क्र read more >>
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