"यह जो चेहरा दिए-
कई-कई रूप रब ने"
"चेहरा ख़ुद का-
छुपाया दिल तेरे रब ने"
"तू खोजता फिरता-
रब को कई-कई दर में"
"यह दिल-
दरबार उसका रचा रब न� read more >>
आदमी बनना पड़ता है। खाली जन्म आदमी कुल में लेने से नहीं हो जाता है। अपनी भावना एवम् कर्म को सादगी की राह पर रखना पड़ता है। तब जा के समाज � read more >>
"नारी"
"इस धरा पर पुरुष प्रजाति ने इस धरा की हर वस्तु पर विजये हासिल की है,चाहे वो धन,सम्पति,शक्ति,ज्ञान या अधिपत्र क्यो न हो उसने इस धरा क read more >>