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श्रद्धा से ले माता वैष्णो देवी का नाम फिर बिगड़े बनेंगे तेरे काम, सारी मनसा होगी पूरी मनसा देवी की भक्ति नहीं करोगे जब अधूरी, शीतल खुश ह read more >>
ए जिंदगी अब तेरी अमानत है मिला जो तू मुझको मेरा नसीब है जो ख्वाब देखें थें मैंने तू वही हकीकत है ले जाएं मौत अगर हमको ,चले जाएंगे हुई � read more >>
दिन-रात तेरी याद में कितना तड़पते हैं हम तुझे खबर ही नहीं कैसे जीते हैं हम जिंदगी जी तो रहें हैं पर जिंदगी है कहां मौत भी हमें देख अब � read more >>
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति से उपजी हुई बिहार व उप्र की पाटियां-राजद, जदयू और सपा की मांग है कि देश में जातीय गनगणना हो� read more >>
लोगो की गलत निगाहें भले ही कितनी पड़ी हो तुम पर, एक ताजमहल हो तुम, तुम्हारी नक्काशी की गवाही ये पूरा जहां देगा।। read more >>
बचपन से ईमानदारी का सबक बहुत सीखा हमने पर इस दुनिया के बहुत से लोगो को बेईमानी से ही आगे बढ़ते देखा हमने।। read more >>
आ चलेंगे उन्माद- के हद तक महोब्बत करेंगे, आ पूजा है दिल की- महोब्बत हर दिल से करेंगे, आ दिवानें हम जहां- में गीत प्यार का हम गाएंगे,, आ read more >>
बचपन के वह दिन याद आते हैं, रामलीला देखने की खुशी जब हम बर्दाश्त नहीं कर पाते थे, आज के बच्चे रामलीला देखने क्यों नहीं जाते हैं, टीवी मोब� read more >>
*राजा* "राजा" अगर इस शब्द को दुनिया के सबसे वजनदार और ताकतवर शब्द में शुमार किया जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। न केवल इस शब्द को अपितु इस read more >>
ये समय गुजर जाएगा ये आज फिर नही आएगा सोच के तू कदम बढ़ा पंछी तू एक दिन मिट जाएगा ये समय गुजर जाएगा मत रख अभिमान, फिर से ये पंचभूत बन जा� read more >>
मन रे बेचैन- तू क्यों है बेगाना, तोहे न चैन- बसे क्यों है बेगाना,, तू रे चंचल- तेरा न कहीं ए-ठौर रे, ए-मन- भटके तीनों लोक बेचैन रे....!!!! -मो� read more >>
सृष्टि ने बनाया मनुष्य- स्त्री और पुरुष दो यहीं जाती, इसके बाद- ना कोई जाति दुनिया में देखा,, सृष्टि ने दिया- सुंदर नयन एक दृष्टि सबको, read more >>
नमस्ते दोस्तों 🙏🙏 कहते हैं दोस्तों ! मां-बाप की असली खुशियां उनके बच्चे में होती है ! उनकी मुस्कान , सफलता , तरक्की में होती है .... पर क्य read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रोने से क्या फायदा,आगे का यूं सोच। रहो दूर तकलीफ से, जीवन में हो लोच।। रोने से क्या फायदा,ग� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आता है सच सामने,मंथन जब हो तेज। और दूध का दूध हो,मन में हो अंगेज।। आता है सच सामने,वक्त रहे अ� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" कहने को सब कह रहे,आते सभी न काम। खुद के चलें विवेक से,जीवन हो गुलफाम।। कहने को सब कह रहे,लोग� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" दुख का कारण खोजिए,सदा रहें तब मस्त। बुरे चीज से दूर रह, होगा कभी न अस्त।। दुख का कारण खोजिए,� read more >>
जंगल से मंगल है। जंगल है तो पर्यावरण संतुलन बना रहता है। समयानुकूल वर्षा भी होती है। और अच्छी फसल से लोगों में उत्साह भी बना रहता है। आ� read more >>
जंगल से मंगल है। जंगल है तो पर्यावरण संतुलन बना रहता है। समयानुकूल वर्षा भी होती है। और अच्छी फसल से लोगों में उत्साह भी बना रहता है। आ� read more >>
आकर्षण कभी प्रेम को जन्म नहीं होने देता और प्रेम आकर्षण को कभी जन्म ही नही लेने देता read more >>
आकर्षण कभी प्रेम को जन्म नहीं होने देता और प्रेम आकर्षण को कभी जन्म ही नही लेने देता read more >>
खुशियों की चाबी, माता देगी आज ही, खुश होकर कह दे बस जय माता दी, खुशियों की तिजोरी खुद खोलेगी माता तेरी मेरी। अब ना कर देरी, जय माता दी कहत� read more >>
"आत्मा सही और- गलत की सूचना देती है"! "परंतु मनुष्य मन के- वज़ह भ्रमित हो जाता है"! "इस परख की चुनौती- को जिसने हासिल किया है"!! "असल में उस- read more >>
"देखा ए-अरमानों के- बुलबुलें सजा के हमने"! "देखा जगमगाते सपने- ए-ख्वाब सजा के हमने"! "हक़ीक़त में यह मानव- शरीर ख़्वाब नहीं अरमान नहीं"!! read more >>
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