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"कभी लगती- कांटों की सेज ज़िंदगी"! "कभी लगती- बहार-ए-जन्नत ज़िंदगी"! "सुख-दुख- दो साथी चलते ज़िंदगी में"!! "चले-चल- वीर मंज़िल को ज़िंदगी � read more >>
ऐ अजनबी आ जरा पास तो आ, कुछ बात तुम कहो कुछ मैं कहूं। फिर धीरे_धीरे दोनों करीब आयेंगे, और मस्ती के नगमें तब गायेंगे। दोनों कि दोस्ती बे� read more >>
चलत्तें हैं राह मंज़ील को राहीं, स्पनों का नगर बनाने को! स्पनें पलत्तें उन नैनों में, ज़ो ज़गत्तें विश्व ज़गानें को!! निद्रा क� read more >>
क्यूं गांव खाली, रह गए, जंगल वीरान, रह गए। हंसी गूंजती थी, जिन आंगन में, क्यूं वो सुनसान, रह गए। कोई तो रोके, पलायन को, बचाने हमारी, जड़ों � read more >>
एक लेखक का जीवन भी, बड़ा कठिन होता है । न कोई, साथ देता है, न कोई, काम देता है। मेहनत कर लो, चाहे कितनी ही, जेबें खाली, रह जाती हैं। उसके हि� read more >>
कागज रोती नही रुला देती हैं। read more >>
"जनाब- अद्भुत अचरज देखा हमने"! "ए-तमाम- मंदिर-मस्जिद-चर्च हमने"! "ईश प्रेम में- श्रद्धा और भक्ति को देखा"!! "हमने- सिर्फ मानव मात्र को दे� read more >>
गाजा पट्टी में मौजूद हमास उग्रवादियों के द्वारा सबसे पहले 7 अक्टूबर 2023 को तकरीबन 5000 राकेट लगातार दागकर इजराइल के लोगों को निशाना बनाया � read more >>
दुनियाँ के रंगीन जो हैं नजारे, जो देते हैं हमें बेहिसाब बहारें। नाना प्रकार की वस्तुएं मेरे लिए, कुदरती सम्पदा है मेरे लिए। ये सारे � read more >>
एक श्येन हो सयाना, उड़ा पारापार। इठलाता, बल खाता, देखा विक्ष पसार। चिड़ी बावली, खेत खोखला, उपजे उपज़ हज़ार । सरसर- सरसर पर फैलाए, चीरे � read more >>
वो मुझे प्यार नही करता श्याद समुझे यह पता था। हे कुछ दिल में उसके जो मुझसे छुपा था। होगा कोई ओर वो जिससे वह जुडा था। मुझे ऐसा लगा जै� read more >>
कसेे समझाऊ खुद को के इतने बडे जहान में तेरा कोई मुकाम नही था। हे छोटा-सा आशियाना अपना इतने बडे जहान में जिसका कोई निशान नही था। मिलत read more >>
सामने रह कर भी , अब, कुछ कहती .. मैरी मैया रानी , के नैनों से, गंगाघार बहती नहीं....हो वक्त मुश्किल है फिर भी मुश्करा रहा हूँ। बैटा माँ क read more >>
Once upon a time in a small, picturesque town, there lived a young woman named Emma. She had an affinity for books and spent most of her days in the quaint local library, immersed in the worlds created by her favorite authors. Her eyes sparkled with curiosity and her heart longed for the kind of love she had read about in countless novels. Acros read more >>
"महखाने" "हम यूँ ही नहीं पहुँच जाते हैं,रोज शराबे महखाने में,शराब को अपने अधरों से लगाने,मजबूर होते हैं,उनकी निगाहों से छलके हुये आँसुओ� read more >>
"इंसानों को बटते- ये रंगभेद करते देखा"! "कहते ईश्वर-अल्लाह- भगवान् रूप कई देखा"!! "सो भाषा बीच है- नाम अनेक रूप कई देखा"! "जगत धरा में रूप- read more >>
"जीवन- को जाता है जो मार्ग"! "भाई- वही हृदय तक का मार्ग"! "रूबरू करा दे- हृदय स्थित परमानंद का"!! "वह सद्गुरु- संत-शिरोमणि भाई"....!!!! -मोती read more >>
श्राद्ध करो खूब करो यकीन आपको पूरा है। मिल गई मुक्ति पूर्वजों को ये विश्वास अधूरा है।। खीर बनाई पूरी बनाई और बने नए पकवान है पता सभी क� read more >>
संविधान बदलने की तुम सोचो सोच आपकी तो लाजबाव है क्या तुम भूले बैठे हैं सबको करोड़ों की आत्मा का सवाल है चंद्रशेखर अभिषेक जाटव सतपाल � read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रोक सके तो रोक ले,मस्त अटल हम फौज। प्यार भरा उपहार से,देने आया मौज। लेने आया दर्द को,मेरा � read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपनों के ही साथ है,माँ का प्यार दुलार। सुन ले मेरा अर्ज अब,जीवन कर गुलजार।। कभी कभी नीरस ल� read more >>
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" सुन ले मेरा अर्ज अब, जीवन कर गुलजार। अपनों के साथ है,माँ का प्यार दुलार।। माँ का प्यार द read more >>
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माँ का प्यार दुलार,सदा कायम रहता है। खुद पर हो विश्वास,उसे सबकुछ मिलता है। प्राण समर में या read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हमसब को नित ही मिले,माँ का प्यार दुलार। नेक इरादा यदि रहे, जीवन हो गुलजार। लिए धर्म को सा� read more >>
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