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बाहर से जितने, मज़बूत दिखते हैं। अंदर से उतने ही, क़ायल, कमज़ोर होते हैं। एक पैसा नहीं जेब, पैसे -पैसे तक तरसते हैं। संतान की हर ख्वाहि� read more >>
कमबख्त यह दर्द सत्ता का जोर है कि हटता ही नहीं, दर्द है महंगाई का दोर है कटता ही नहीं।। अब तो बात अंत पर आ गई है, दर्द ए महंगाई मेरे सीने प� read more >>
हृदय में राम भगवान राम की खोज मणिक में क्या बंदर वृत्ति उचित कहना? क्या अंतर्मन में प्यास प्यार, का अनुचित है चरित्र कहना पानी पानी क read more >>
हृदय में राम भगवान राम की खोज मणिक में क्या बंदर वृत्ति उचित कहना? क्या अंतर्मन में प्यास प्यार, का अनुचित है चरित्र कहना पानी पानी क read more >>
हृदय में राम भगवान राम की खोज मणिक में क्या बंदर वृत्ति उचित कहना? क्या अंतर्मन में प्यास प्यार, का अनुचित है चरित्र कहना पानी पानी क read more >>
"शहर" "एक लम्बे अरसे के बाद हम अपने शहर पहुंचे हैं, और पहुँचते हैं, उस गली में जिस गली में उनका एहसास अभी-भी जिंदा नज़र आता है" #Mukesh Namdev read more >>
जरुरत, जरुरत,जरूरत, एक मजबुरी है । औकात के आईने पे जब जमी हो घुल । , देखिए तब तेवर, अपनो के मोल- भाव के बाजार गर्म हो जाएगे , फुर्सत ,कहा read more >>
दीप ही दीप प्रज्ज्वलित हों जग में चहुं ओर। हर चेहरे पर खुशी हो, दिल किसी का न दुखी हो। इस दिवाली सबकी जिंदगी रोशन हो ऐसी शुभकामना हर क� read more >>
#विधा:-दोहा छंद #"नमन सृजन समीक्षा मंच" जो अपने को मानते,उनको दें सम्मान। साझा करें विचार को,और बढ़ाएं ज्ञान।। जो अपने को मानते,उस� read more >>
तेरी ये- गीत कैसे गाऊं, तेरी ये- सुर कहां से लाऊं, दे-दे सुर- तू कोयल मतवाली... प्रीतम- को प्रीत सुर तुम्हारी....!!!! -मोती read more >>
(Sortha Chhand) खिलते जब हैं फूल,दिव्य खुशबू तभी उड़े। उड़ते जब हैं धूल,एक अड़चन नव्य दिखे।। होती है बरसात,कलियाँ सारी तब खिले। आती जब है रात,� read more >>
#विधा:=दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" पहले जैसे अब कहाँ,मिले नहीं कुछ बात। कुछ तो काला दाल में,भीषण मय है रात।। पहले जैसे अब क� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नमक छिड़कते घाव पर,ऐसे गन्दे लोग। लेते हैं तब वह मजा,जैसे उनको रोग।। नमक छिड़कते घाव पर,हो� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार। और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।। मन से मन को मेल क� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आया करवा चौथ है,लाया खुशी हजार। पत्नी ने पति के लिए,करी भव्य श्रृंगार।। आज करेगी चाँद का,प� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जलता दीपक आस का,देगा शुभ परिणाम। तन मन चन्दन तब बने,खुशबू दे अविराम।। ऐसी खुशबू है इसे,करत� read more >>
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने को जो मानते,लगते हैं दिलदार। ऐसा दिल अब है लगा,करता दृढ़ किरदार। ऐसे दृढ़ किरदा� read more >>
शाम लगभग नौ बजे एक दिन निकला सड़क पर शाम लगभग नौ बजे मैं गया कुछ दूर देखा सब्जियां कुछ थे सजे, टिमटिमाते मोमबत्ती की उजाला के तले बे read more >>
मानवता शर्मसार हुई जब एक अबला लाचार हुई रूप बदले अंदाज बदले दया धर्म करने वालो के भी लिहाज बदले रोती बिलखती मदद की गुहार करी सबने म� read more >>
रुप बदले अंदाज बदले दया धर्म करने वालों के लिहाज बदले बदल गया यह पूरा जमाना मुसीबत आई जब एक अबला पे सबके राज बदले मानवता शर्मसार हुआ read more >>
एक हसरत- मन में उठी, जब से तुम्हें देखा है,, ये आया- चैन दिल को, जब से तुम्हें देखा है,, सुकून में- गुज़रते अब हर पल, जब से तुम्हें देखा � read more >>
घर के देख हालातों को खुद से ही मैं रूठ गया हूँ ज़िम्मेदारीयों का बोझ लिए आज कमाने निकल गया हूँ। पसीने से कपड़े हैं लतपत हाथों पर मेह read more >>
वफा माँगी थी अब क्या दगा दोगे। साथ दिया नही तुने किसी का अब तुम किससे वफा माँगोगे। अब डूब रहे हो तुम किसका साथ माँगोगे। मौका दिया नह� read more >>
बात उन दिनों की है जब हमारी शादी एक संयुक्त परिवार में तय हुई। मुझे पहले से ही पता था कि मेरे पति अपने माता-पिता अपनी दो बहन दो भाइयों के read more >>
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