कमबख्त यह दर्द सत्ता का जोर है कि हटता ही नहीं, दर्द है महंगाई का दोर है कटता ही नहीं।।
अब तो बात अंत पर आ गई है,
दर्द ए महंगाई मेरे सीने प� read more >>
"शहर"
"एक लम्बे अरसे के बाद हम अपने शहर पहुंचे हैं, और पहुँचते हैं, उस गली में जिस गली में उनका एहसास अभी-भी जिंदा नज़र आता है"
#Mukesh Namdev read more >>
(Sortha Chhand)
खिलते जब हैं फूल,दिव्य खुशबू तभी उड़े।
उड़ते जब हैं धूल,एक अड़चन नव्य दिखे।।
होती है बरसात,कलियाँ सारी तब खिले।
आती जब है रात,� read more >>
#विधा:_दोहा छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार।
और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।।
मन से मन को मेल क� read more >>
एक हसरत-
मन में उठी,
जब से तुम्हें देखा है,,
ये आया-
चैन दिल को,
जब से तुम्हें देखा है,,
सुकून में-
गुज़रते अब हर पल,
जब से तुम्हें देखा � read more >>