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कुछ समय पहले तक ऐसी उदासी न थी चारों ओर ऐसा सन्नाटा ना था मुर्गे की आवाज से पक्षियों की चहचहाट से होती थी सुबह शुरुआत न जाने कहां से द� read more >>
कब्र पर मेरे एकबार सनम तू आजा जीते जी तो वक़्त ना दिया कभी अब तो आजा देख कितना दूर चली गई मैं अब तो शिकायत भी ना कर पाऊंगी मैं अपने हाथ� read more >>
एक औरत मर्द के लिए सब करती है पर मर्द को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, उनलोग की सोच ही वैसी है कि औरत है तो उसे तो ए सब करना ही है पर औरत अगर कभी read more >>
कितने पागल थें हम अंधकार में रोशनी को तलाश रहे थें भला कभी कोई बुझ कर भी जलता है क्या धन्यवाद read more >>
खतरनाक वायु प्रदूषण से न केवल देश की राजधानी दिल्ली की आबोहवा बेतरह दूषित हो गई है, अपितु पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राज� read more >>
"इस... वसुधा में आते जो बारंबार हैं"! "सजाते... संत शिरोमणि यहां दरबार हैं"!! "दुर्लभ गुरु... ए-धरा में सहज-सुलभ ए-कृपा है"! "यहां... राम-नाम-ज्ञ read more >>
थोड़ी ही देर में, बना -बनाया काम, बिगड़ जाता है। सबसे आगे वाला, पिछड़ जाता है। थोड़ी ही देर में, जीतने वाला, जाता है हार। हारने वाले की, � read more >>
#विधा:- दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" होगा भला समाज का,जब खुद में हो शक्ति। कुछ ऐसा ही काम कर,मिले न कहीं विरक्ति।। होगा भला समा� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मन में धीरज राखिए,तभी मिलेंगे नूर। श्याना बनकर हम यहां,लेते रहें सरूर।। मन में धीरज राखिए, read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अंतिम दिन वनवास का,होगा रावण अंत। खुशियाँ भारत वर्ष में,करते जय_जय संत।। अंतिम दिन वनवास � read more >>
गरीबी ने सारे अरमानों को जला कर राख कर दिया, अपनों के भीड़ से सरेआम बाहर कर दिया। अपने ही समाज ने जिल्लत भरी जिंदगी है दी, जिंदगी की सा� read more >>
गरीबी ने सारे अरमानों को जला कर राख कर दिया, अपनों के भीड़ से सरेआम बाहर कर दिया। अपने ही समाज ने जिल्लत भरी जिंदगी है दी, जिंदगी की सा� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नारी तेरा संग हो,फिर तो है आनंद। सुख दुख को हम बांट कर, पिएं नित्य मकरंद।। नारी तेरा संग हो,� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,जीने के सब ढंग। अनुभव की जब दीप हो,रहे प्रगति तब संग।। जीना है तो सीख ले,जी read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,सरा हुआ है अक्ल। अब तक भी पीछे रहे,करते खाली नक्ल।। तेरी क्या औकात है,आए � read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" समझो जीवन अर्थ को,हमें मिला वरदान। जगत सजा संगीत से,बनिए सदा सुजान।। समझो जीवन अर्थ को,रहे read more >>
फाटकी झोळी दारी आली, कामा पूर्ती मामा झाली . चोर चोर बग कोण? सरकार आली, सरकार आली . मी नाही देश प्रेमी , आहे सैनिक पुजारी, कारण देशाला खाणा read more >>
डोकावे रुद्यात कोणी , कोणी माझे ही व्हावे. जेवलास का, रात्रीला msg मला ही यावे. जागावे मी ही रात्र भर ,आयुष्य तिच्या सोबत जगावे. शेवटी या ह read more >>
क्या गजब,सिखे है। रब से बहाने दैखते , ही तुझे हम मुश्कराएऐ फिर से,तेरे वादे अब याद आऐ । रिमझिम ये बरसती ये बारिश तेरी बाते याद दिलाऐ � read more >>
In an era dominated by tweets, likes, and rapid consumption of digital content, the art of writing literature seems to be fading into the background, struggling for relevance. The decline of literary expression is a complex issue, rooted in the fast-paced nature of modern life, the allure of instant gratification, and the evolving landscape of comm read more >>
In a world dominated by fleeting tweets and bite-sized content, the art of writing literature seems to be fading into the background. The decline of literary expression raises concerns about the richness of human communication and the depth of our shared experiences. Let's explore why writing literature is facing a downturn and consider strategies read more >>
"ये पागल- हुए हैं दिल दे के हम"! "देखो- लुट गए इंतजार में हम"! "गुज़रे हुए- लम्हें एक आशा है किरण"!! "एक- पनाह को जिएं जा रहे हम"!!!! -मोती read more >>
"असीम कृपा- भगवान् धन्वंतरि की बरसे"! "हृदय से हों- अमीर कुबेर की दया बरसे"! "दिल में शांति- घर संसार में व्याप्त रहे अपार"!! "ए-मिटे- दूर� read more >>
उनकी बातो से झलकते प्यार के लतिफे, मेरी इरादों मे वो बसा जा ही रहे, वो हर अंदाज़ मे दिखाते मोहब्बत कि झलके, मीठी मुस्कान से केह रहे हर इरा read more >>
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