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#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" समझो जीवन अर्थ को,हमें मिला वरदान। जगत सजा संगीत से,बनिए सदा सुजान।। समझो जीवन अर्थ को,रहे read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नारी तेरा संग हो,फिर तो है आनंद। सुख दुख को हम बांट कर, पिएं नित्य मकरंद।। नारी तेरा संग हो,� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,जीने के सब ढंग। अनुभव की जब दीप हो,रहे प्रगति तब संग।। जीना है तो सीख ले,जी read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,सरा हुआ है अक्ल। अब तक भी पीछे रहे,करते खाली नक्ल।। तेरी क्या औकात है,आए � read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काटे कटी न रात अब,रहूं बड़ा बेचैन। जब से देखा हूं उसे,वही बसी है नैन।। काटे कटी न रात अब,रहत read more >>
भूल के अपने दर्दों-गम को मैं भी उडना चाहूँ। हे लाखों उम्मीदें जिस दिल में मैं भी उससे जुडना चाहूँ। लगते हे कितने प्यारे ये आसमान-तार� read more >>
मेरे जाने का ग़म ना करना दोस्तों हंसते हंसते दे दो विदाई मुझे याद हमेशा तुम आओगे भुले से भुलाओगे कहती मेरी परछाई मुझे अलविदा अलविदा � read more >>
सामने गुस्से से, डांटती, डपटती है। सोए हुए का धीरे से आ, माथा चूमती है। सामने निठल्ला, निकम्मा, कामचोर कहती है। बाहर मेरी बड़ाई करते, क read more >>
भगवान ने किस मिट्टी से इंसान को बनाया है । जिस तरह मिट्टी एक है, नाम अलग अलग है।। और उसी नाम से मिट्टी की पहचान होती है। उसी तरह इंसान भी read more >>
"मक़सद न हो- कोई सफ़र यूंहीं, कट जाए वीरानों में!" "मक़सद- बिना यह ज़िंदगी, यूंहीं कट जाए वीरानों में!" "यह रत्तन- अनमोल मानव तन, कहीं ख� read more >>
"कल्पना की हवा-हवाई... में कहां खो गए हम, "कल्पना ए-मन की... हवा-हवाई में खो गए हम,, "ये तन हीरा मिला कहां... ये मन के डगर खो गए हम, "ये मेरा हुआ � read more >>
एकता दिवस लोह पुरुष जो कहलाया था, भारत को एक बनाया था, आजादी में अपने संघर्षों से एकता का दीपक जलाया था, ये थे हमारे वल्लभ भाई पटेल जिन� read more >>
तेरे बिना जी ना सकी मर कर भी मर ना सकी भटकती हूं मैं अब देखो दर - दर कहीं कैसे कहूं क्या मैं कहूं बिन कहे भी चुप ना रहूं सोचती हूं कि आज क read more >>
कभी - कभी कोई एक शक्स आपकी जिंदगी को हिला कर रख देता है ,प्यार ना हो उसके बावजूद उसके बिना कहीं चैन ना आता है , अजीब - सा रिश्ता दिल से जु� read more >>
मैं तो तेरी जरूरत हूं यारा पर,तू तो मेरी जिंदगी बन गया है जैसे सांसे के बिना जिंदगी अधूरी उसी तरह तेरे बिना मैं अधूरी हूं यारा पर,तुझे � read more >>
आज बहुत दिनों बाद मेरी नजर मेरी डायरी पर गई ,तो देखी डायरी पर धूल जम गई थी और मैं जैसे रखकर गई थी आज भी उतने साल बाद वह उसी जगह पर रखी हुई ह� read more >>
मेरी मुस्कान को🌹🌹🌹🌹 अपनी मुकद्दर कहते हैं भींगी पलके मेरी तो💐💐💐💐💐 सुख जाएगा समंदर कहते हैं 🌻🌻🌻🌻🌻जीत लुंगी मै हर मंज़र क्� read more >>
आंगन की रौनक खुशियों का खुमार लिखूंगी कलियों सी खिलने वाली बेटियों का संसार लिखूंगी कहने को तो मां की लाडली और पापा की परी होती है � read more >>
मैं बावली पहली बार आई हूं तेरे दर्शन को मईया तेरे दरबार आईं हूं खड़ी हूं कतार में कब से तेरे इंतज़ार में मन मस्ताना हुआं अम्बे तेरे प् read more >>
मेरे चाहतों का शिखर दे दिया मां सरस्वती शुक्रिया अपने राग स्वर दे दिया मां सरस्वती शुक्रिया रच दूं कविता कहानी ऐसे शब्द दे दिया मा� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नमक छिड़कते घाव पर,ऐसे गन्दे लोग। लेते हैं तब वह मजा,जैसे उनको रोग।। नमक छिड़कते घाव पर,हो� read more >>
क्षण भंगूर सा है ये मानुस, दर्पण की तरह बिखर जाये, मन मे ले जब दृढ- संकल्प, हीरे की जैसे निखर जाये, फिर भी ना जाने मुझे यहाँ, भांति भांति � read more >>
खुबसुरती की सारी हदें पार मैंने देखीं जब मुस्कुराती हुई मां मैंने देखी देख चेहरे की रौनक उनकी रौशनी सुरज की भी शरमाने लगी तस्वीर उन� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार। और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।। मन से मन को मेल क� read more >>
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