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नगरों की गलियों गलियों में , मैंने ढूढ़ा तुमको मधु शाला बसती हो तुम जहाँ पर , तेरे ही दीवाने है मधुशाला तु� read more >>
जब तक खामोशी तेरी ये कुछ ना कहेंगी समझ.......!! तब तक बन्दा ये तेरी मुस्कान देखता रहेगा । । read more >>
हुस्न वाले हुस्न तराशते है ।। दौलत वाले दौलत तलाशते है । सिकन्दर के जहां में..........! समुद्र में रहने वाले भी प्यास जानते हैं ।। read more >>
हाथ की लकीरों में खज़ाने होते । तों मुकद्दर की क्या बिसात थी ।। हर कोई शहंशाह होता !! दुनियां में मेहनत पे ....... यकीन करने वालों की क्या औ� read more >>
नारी के सब रूप को,वंदन बारंबार जो करती सद्कर्म से, दोनों कुल उंजियार दोनों कुल उंजियार,सती श्री वीणा पाणी ममता करुणा मूर्ति, जगत की है read more >>
जरूरी तो नहीं ************* इश्क हो फिर जुदाई हो जरूरी तो नहीं हमने भी चोट खाई हो जरूरी तो नहीं उनकी खुशी के खातिर हम दूर हो गए रिश्ते में बेव� read more >>
निशा से चला - सारें दिशाओं से चला ; पाला लिऐ पवन , ठिठुर रहा रज़ाई - सारी रात - ठिठुर के रज़ाई में लूँ अंगड़ाई । जल्दी से उठो सूरज भाई - रा read more >>
दोस्त एक बार सुन तुझे उसकी खामोशी की खबर है । क्या .......? चाहत है उसे , मुहोबत है ।उसे , चाहें तो नब्ज देख लें !।। 2।। राज ।। read more >>
दौलत ही दौलत बिखरी है । रास्तों पे, खूबसूरत एक निर्माण और होगा चाहत की वसीयत पे . क्या लिखु......? अपनी मुहोबत की सुंदरता जानती हो तुम.. ....... read more >>
एक सच्चा झुठ तेरा ...... तुझे बेपर्दा क्या.....करता ? दर्द के उन पलों की औकात में एक तेरा ही चेहरा देख रहें थे .......हम । read more >>
अपने पराये क्यों, लगने लगे हैं रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं . कल तलक जो साया बनकर ,साथ-साथ चलते आज है ख़फ़ा जैसे ,अंजान हो कोई हम. अ� read more >>
तारीखें तय कर , इम्तिहान अभी......और ....बेजार होंगे....! मुश्किल में है । मुकद्दर के सिकन्दर का अब हर ख्वाब ... अपने फैसले पर ज़रा ग़ौर कर.....! read more >>
तेरे फसलों को कबूल करते-करते अब दिल की चाहत खत्म हो गई। ना मालूम क्यों.......... पर अब राहत खत्म हो गई ।। read more >>
क्या फर्क है ...... ? अब किसी के सच, और झुठ में ............! तेरे फैसले ने ............! वैसे भी ,मेरी किस्मत बदल दी ।।राज।। read more >>
ज़मीं पर बैठ, कभी चलती, कभी फुदकती है। कभी खा़मोश, कभी खालसा- सा गाती, कहां सुनती है? कभी फुर- फुर फुरती में। कभी सघन में सघन ढूंढ़ती है read more >>
@असली शिक्षित तो जिंदगी करती है हमें, जो व्यवहार हम करते हैं वह हमें शिक्षा सिखाती है...!! read more >>
"स्याही" "एक अरसा हो गया है,तुम्हें कागज पर उतारे हुये लगता है,तुम्हारी यादों की स्याही सूख के बेजान हो गई है" #Mukesh Namdev read more >>
हमको जो कहते हो तुम , क्यों पीते हो हाला , पुरखे भी पीते थे ,तेरे दीवाने थे मधुशाला । नये नये है हम , ह� read more >>
समझदार बहुत थी । अपनी मुश्किलों से वास्ता निकाल गई ।। लेती रही, जिंदगी इम्तिहान पे इम्तिहान पर ,वो आखिर ,हारी नहीं ....... अपनी मंजिल का र� read more >>
तेरी आँखों की ये धुन लगता है।तूने मुझे लिया है।चुन तेरी आँखों की मेरी आँखों से ये लड़ाई दूर हो जाये तेरी आँखे तो लगती है।जुदाई तेरी आ read more >>
बचपन की वो सुनहरी यादें, मिट्टी में खेलना, बिन चिंता के साधें। वो कागज की नावें, बारिश का पानी, हर दिन की मस्ती, हर रात की कहानी। माँ की read more >>
कृतज्ञता कब तक ? मै जब भी दानवीर कर्ण को पढ़ता, सुनता, किसी दृश्य साधन से उसकी जीवनी कहानियों को देखता तो कर्ण को बहुत कोशता l सारी गलती इस� read more >>
आज ही क्यों नहीं ? एक बार की बात है एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था | गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन read more >>
आज ही क्यों नहीं ? एक बार की बात है एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था | गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन read more >>
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