ये रूठना , ये मनाना, अब रहने दो.....
तुम सही , मैं गलत.....
जो भी हैं अब रहने दो.....!!!
अब तो अच्छा है आंखों का बंजर हो जाना....
होठों पर सजी ख़ामोशी,अब read more >>
मुझे लगता है , मैं और मेरी सोच हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं! शायद इसका कारण हमारी भावनाएं और हमारी सोच दोनों का अलग-अलग होना हैं , नहीं ऐसा भ� read more >>
नदी जब समंदर में मिलेगी तो खारी हो जाएगी,
चाँद जब जमीन पे उतरेगा तो दाग हो जाएगा,
तुम छुपकर घर में रहते हो,
अच्छा है उसी में रहा करो,
जब � read more >>
नदी जब समंदर में मिलेगी तो खारी हो जाएगी,
चाँद जब जमीन पे उतरेगा तो दाग हो जाएगा,
तुम छुपकर घर में रहते हो,
अच्छा है उसी में रहा करो,
जब � read more >>
नदी जब समंदर में मिलेगी तो खारी हो जाएगी,
चाँद जब जमीन पे उतरेगा तो दाग हो जाएगा,
तुम छुपकर घर में रहते हो,
अच्छा है उसी में रहा करो,
जब � read more >>
नदी जब समंदर में मिलेगी तो खारी हो जाएगी,
चाँद जब जमीन पे उतरेगा तो दाग हो जाएगा,
तुम छुपकर घर में रहते हो,
अच्छा है उसी में रहा करो,
जब � read more >>
नदी जब समंदर में मिलेगी तो खारी हो जाएगी,
चाँद जब जमीन पे उतरेगा तो दाग हो जाएगा,
तुम छुपकर घर में रहते हो,
अच्छा है उसी में रहा करो,
जब � read more >>
"रूह" (आत्मा)
धुर धाम के लिए चली, मैं रब के दर की थी कली
भुला चुकी थी आप को, थी काल में रली मिली
मैं ढूंढती सी शांति को इस धरा पे जो न थी
वो श read more >>
"रूह" (आत्मा)
धुर धाम के लिए चली, मैं रब के दर की थी कली
भुला चुकी थी आप को, थी काल में रली मिली
मैं ढूंढती सी शांति को इस धरा पे जो न थी
वो श read more >>
"रूहानियत के लिए",
वो नूर (ईश्वर) मेरे भीतर है, मैं (अहं) मानती नहीं है
रूह रोज़ अपने रब के सजदे से चूकती है।
इश्क खुदा की जात है इश्क कि ड� read more >>
ये उम्र भी गुजर रही हैं,
अब तो हम किसी से कुछ कह भी नहीं सकते.......!!
मर गई हैं ख्वाहिशें सारी,
अब तो खुद को ज़िंदा कर भी नहीं सकते..,....!!!
सांसे ह read more >>