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सड़क सुरक्षा कितना प्रासंगिक? मनुष्य मूलतः एक यायावर प्राणी है. यात्रा उसके जीवन की धूरी है. वह चाहे-अनचाहे बहुधा अपने जीवन का एक बड़� read more >>
सड़क सुरक्षा कितना प्रासंगिक? मनुष्य मूलतः एक यायावर प्राणी है. यात्रा उसके जीवन की धूरी है. वह चाहे-अनचाहे बहुधा अपने जीवन का एक बड़� read more >>
सड़क सुरक्षा कितना प्रासंगिक? मनुष्य मूलतः एक यायावर प्राणी है. यात्रा उसके जीवन की धूरी है. वह चाहे-अनचाहे बहुधा अपने जीवन का एक बड़� read more >>
यह बात है जज्बातों की अच्छे एहसासों की, दुनिया का यह दस्तूर है चुप रहने वालों का ही कसूर है, करता नहीं कोई किसी का मान सम्मान, सब की अपन� read more >>
गुरु और शिक्षा का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें आप हर दिन हर वक्त एक दूसरे से कुछ ना कुछ सीखते रहते हैं। लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
14 अप्रैल का दिन बहुत ही खास दिन होता है क्यूंकि 14 अप्रैल को एक बाबा की जयंती है। बाबा का मतलब कोई पाखंडी साधु नहीं, जो सच में बाबा थे। मैं read more >>
आहिस्ता आहिस्ता जिंदगी बीत रही थी, मन चंचलता में खेल रहा था। उम्र ने भी क्या खेल खेला जवानी की लालसा दिखाकर, बचपन को भी छीन रहा था। जीव� read more >>
लोग गुण और अवगुण में से ज्यादा अहमियत गुणों को देते हैं, जबकि अवगुणों से ही सीख कर गुणों की परिभाषा समझी जाती है. लेखक पंकज कुमार बुड़ा read more >>
माँ और बेटी का रिश्ता चाहे कितना भी प्यारा हो, लेकिन एक बेटी माँ बनकर भी अपनी माँ का दर्द नहीं समझ सकती. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
किसी से भी उम्मीद तब तक होती है जब तक हमें हर चीज पाने की लालसा रहती है, जिस दिन लालसा खत्म उस दिन से उम्मीदें भी खत्म. लेखक पंकज कुमार ब� read more >>
रंगों की अपनी है एक अलग पहचान, करता नहीं कोई इन का अपमान, हर बात किस्सों में आती है इनकी याद, कभी-कभी तो यह बन जाते हैं हर किसी के भी विवा� read more >>
कागज और कलम एक दूसरे के जीवनसाथी हैं, जैसे कागज बिना कलम के अधूरा है, वैसे ही कलम बिन कागज के चलती ही नहीं. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
स्वाभिमान अहम् के रोग का निदान है !स्वाभिमान शब्द आत्मगौरव और आत्मसम्मान के लिए प्रयुक्त होता है। यह ऐसा शब्द है जो हमें जाग्रत करता read more >>
सर्दियों में ही धूप की जरूरत होती हैं, गर्मियों में तो लोग छाता लगा लेते, बस समय समय की कीमत होती हैं। read more >>
देखो बच्चों जाड़ो का मौसम आया, ठण्डी-ठण्डी फुहार लाया, धुआं-धुआं सा कोहरा आया, ठण्ड से कंपकंपाते हैं लोग, पहनों बच्चों स्वेटर और सॉक्स read more >>
श्रद्धा सुमन गौरवान्वित होता अचल धरा हिल उठती है भारत माँ के पूतों को जब शहादत मिलती है। पथ पे बिखरे कंकर तब भावुक हो उठत� read more >>
श्रद्धा सुमन गौरवान्वित होता अचल धरा हिल उठती है भारत माँ के पूतों को जब शहादत मिलती है। पथ पे बिखरे कंकर तब भावुक हो उठत� read more >>
हल्की फुल्की पतली सी एक दरार से ताकता रहता हूँ दुनियाँ को इस पार से दरिया बहाकर ले जाता है अपने साथ कट कर गिरती है जो मिट्टी किनार से read more >>
नन्हें नन्हें पग लेकर आई हैं जग में बेटी , कहलाती हैं लक्ष्मी का रूप घर की शोभा हैं बढ़ाती, किलकारी से उसकी कलिया भी खिलखिलाती, नन्हीं � read more >>
वार और प्यार दोनों एक जैसे हैं, जरा सी चूक होते ही इंसान तबाह हो जाते हैं...... read more >>
रागी को कहीं मंडिया, कहीं, फिंगर, कहीं बाजरा तो कहीं नचनी के नाम से जाना जाता है। इसमें पोषक-तत्वों की मात्रा अत्यधिक रहती है, इसलिए इसे � read more >>
मोती सा मस्तक पर झिलमिल लुढ़क रहा धीरे धीरे झर झर झरता पग तल रज में , जाता चूम चरण तेरे, इस मोती में भाग्य झलकता तेरा जी हो लेकर चल, read more >>
काश मैं होता एक परिंदा उड़ता रहता, आसमान में बिना किसी रूकावट के दूर रहता दुनिया के झंझालो से, रखता नहीं कोई गलत विचार, ना करता दो रंग read more >>
अच्छे संस्कार तन को पूर्ण रूप से ढकने तक ही नहीं बल्कि बुरे विचारों को अच्छाई से ढकने से भी है. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
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