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क्यो थाम रहे हो दहेज का दामन
क्यो थाम रहे हो दहेज का दामन, ना जाने कितनी नारी को दफन करने को,क्यो कर रहे उनका जीना दुश्वार ,क्यो मिटा रहे हो नारी को।
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इंडिया
नफ्रात बुरी है ना पलो इसे ,दिल में खालिश है तो हटा लो इसे, न तेरा ना मेरा हम सबका है ये वतन मिलकर संभालो इसे
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अभीष्ट सिद्धि
अनुराग प्रेम भक्ति लिए शहर शहर भ्रमण करता हूँ करुणा त्याग परित्याग किए जन जन को राग सुनाता हूँ सह सहमति अभीष्ट सिद्धि से जो गरीबी �
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मैं सैनिक हूँ
मैं सैनिक हूँ देश के रक्क्षक मैं सैनिक हूँ मैं देश की सुरक्क्षा करता हूँ सरहद के निगहबानी करता हूँ मेरे भी अपने हैं अपने भी कुछ सपने
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इश्क़बाज़
इश्क़बाज़ सुना हैं तू मुझ पे मरने लगी हैं मेरे ही नाम के माला जपने लगी ये हकीक़त हैं या कोई फ़साना तो नहीं सुना आज कल खूब तू सवरने लगी हैं
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अर्ध्नेशवर
मैं भी तो आप के जैसा बस थोड़ा सा अधूरा नर नारी दोनों मैं मेरे पास भी दो ऑंखें दो हाथ दो पैर सूरत भी आप से मिलता फिर काहे तू भागे हम से
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अमर है उसकी कहानी
इस मिट्टी की गाथा कैसे गाऊं, अनंत है इसकी गाथा। अनंत है इसकी कहानी। जो शहीद हुए इस देश के लिए , अमर थी उसकी जवानी। इस मिट्टी में ज
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कालचक्र के चक्र में
ये बक्त नहीं है रुकने का समय नहीं है झुकने का ये काल के पुकार हैं अवसर नहीं हैं टूटने का मौका बनाओ चल पड़ो अभी फुरशत नहीं सोचने का का�
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माँ जैसी कोई नहीं
माँ जैसी कोई नहीं लोरी गा सुलाने बालि प्यार से खिलाने बालि सही राह दिखाने बालि बला दूर भगाने बालि हमारी गलतियों को माफ़ करने बलि अ�
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मेरे राधेश्याम की अनोखी हैं छवि
मेरे राधेश्याम की अनोखी हैं छवि, मेरे अंखियों में छाई उनकी छवि, मेरे मन को भाये उनकी छवि।
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भक्ति रस की बूंदें में भीगकर देखो
भक्ति की बूंदें में भीगकर देखो, राधेश्याम की नैया में बैठकर देखो, हो जायेगा जीवन सफल राधेश्याम नाम में तैरकर तो देखो। जय श्री राधेश्�
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भक्ति रस की बूंदें में भीगकर देखो
भक्ति की बूंदें में भीगकर देखो, राधेश्याम की नैया में बैठकर देखो, हो जायेगा जीवन सफल राधेश्याम नाम में तैरकर तो देखो। जय श्री राधेश्�
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भक्ति रस की बूंदें में भीगकर देखो
भक्ति की बूंदें में भीगकर देखो, राधेश्याम की नैया में बैठकर देखो, हो जायेगा जीवन सफल राधेश्याम नाम में तैरकर तो देखो। जय श्री राधेश्�
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है इंतजार दुनिया को तेरी
क्यों हताश हो जीवन में, क्यों हो उलझे हुए तुम । यह समय है इम्तिहान का, क्यों हो मायूस तुम । फिर मिल जाएगी यह कलियां, मिल जाए
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उपेक्षित
क़दर करो उनकी, जिनको उपेक्षित कहते हैं। बनकर के ख़ामोश जनाज़ा, सब कुछ सहते रहते हैं। वे सब की जानें, उनकी जाने न कोई। जो उनकी जान ले, वो �
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🙏 कृपा है तेरी माँ(वसन्त पंचमी)🙏
बालक था मैं उस समय , आन्ध्कार मे ढका था जीवन । प्रकाश लेश मात्र ना था , खो रहा था श्वाशन । आन्ध्कार मे बैठ , उजाला कि कल्पन�
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मां
मां शब्द सुनने में कितना अच्छा लगता है ना, अपनेपन का एहसास कराता है ना। प्यार तो सभी करते हैं इस जहां में, पर मां दुलार करती हैं ना।। स
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बुढ़ापे में माता-पिता का सम्मान करें
बचपन में जिन्होंने हर दर्द सह के अपने बच्चों को खुशी से पाला फिर क्यों बड़े होने पर तुम्हारा दिल इतना काला जिन्होंने तुम्हें हर परिस्�
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तेरे दर के सब भिखारी हैं कैन्हया
तेरे दर के सब भिखारी है कन्हैया, आते हैं सब मांगने तुझसे, ये दुनिया सर झुकाती हैं कैन्हया। जय श्री कृष्णा
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तुम्हारे दर्शन को सब तरसते हैं राधेश्याम
तुम्हारे दर्शन को सब तरसते हैं राधेश्याम,प्यारी सूरत,प्यारी सी छवि,करते हो अपने प्यार की बरसात। जय श्री राधे कृष्णा
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फागुन बौराए
साख पर नव पल्लव लग आये, नभ मेंं डोले,बादल इतराये, बाग मेंं कोयल कूक सुनाये, सखी,हृदय मेंं फागुन बौराए। फिर प्रीत का मौसम छाए, पवन बैठ स�
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फागुन बौराए
साख पर नव पल्लव लग आये, नभ मेंं डोले,बादल इतराये, बाग मेंं कोयल कूक सुनाये, सखी,हृदय मेंं फागुन बौराए। फिर प्रीत का मौसम छाए, पवन बैठ स�
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फागुन बौराए
साख पर नव पल्लव लग आये, नभ मेंं डोले,बादल इतराये, बाग मेंं कोयल कूक सुनाये, सखी,हृदय मेंं फागुन बौराए। फिर प्रीत का मौसम छाए, पवन बैठ स�
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जागो!अब जीवन लो तराश
शीर्षक-जागो !अब जीवन लो तराश | जागो अब जीवन लो तराश | नीली धरती से गगन बीच मंगल जीवन रेखा लो खींच कलमयुग कलयुग का इतिहास | जागो !अब जीव
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