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भगवान
भगवान मूर्तियों में नहीं आपकी अनुभूति आपका ईश्वर हैं आत्मा आपका मंदिर हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 💞💞💞💞💞💞💞💞
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प्रेम का गुण ही सुगंध
प्रेम का गुण ही सुगंध, लाख छुपाओ मगर। है ना हीं किसी के वश, उठता ही है महक।। मोती-
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दिलरुबा का जब दीदार
दिलरूबा का जब दीदार, को तड़पता है दिल। जतन जो अब करो लाख, बिन पंख उड़ता वह।। मोती-
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फरिश्ता है हर वो दिल
फरिश्ता है हर वो दिल, जब होता है प्रेम। मिठी-मिठी एक एहसास, दो शरीर एक प्राण।। मोती-
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हरि_प्रेम
प्यारे तारे हरि लगे, लगते तुम हो चांद। दिव्य सितारे आप ही,होते कभी न मांद।। सदा सहारे आप प्रभु,अभिलाषा भी आप। मंजिल भी हो आप ही, करूं आ�
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वृंदावन सुखधाम है
वृंदावन सुखधाम है, जहां अटल अभिराम। राधा रमण निवास से, कण कण है गुलफाम।। वृंदावन सुखधाम है,सुन्दर मृदुल स्वभाव। प्रेम धार में मग्न स�
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संघर्ष करो
तुम थोड़ा तो संघर्ष करो। बढ़ चले चलो आगे मग में कांटों को चुभने दो पग में डटकर बाधा स्वीकार करो दुविधा को जीतो पार करो जो मिले उसी स�
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मन कहता है
मन कहता है कुछ ऐसा लिख दूं मैं अपने मन के भाव को शब्दों में व्यक्त कर दूं मैं ऐ मन तुम चाहो तो मैं कुछ ऐसा लिख दूं जो जीवन की कड़वी स
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*तुम विदेश क्यों जाते हो*
*तुम विदेश क्यों जाते हो* छोड़कर अपनी मातृभूमि को तुम विदेश क्यों जाते हो अपने स्वार्थ की खातिर तुम क्यों परदेशी बन जाते ।। मात-पित�
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मन वीणा के तार है
मन वीणा के तार है, रखूं मध्य में साज। गीत प्रेम का मैं सुनूं,कायम रहता राज।। मन वीणा के तार सा, उड़े फिरे यह तेज। रखता हूं सम्हाल कर,खुश�
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Jeevan hi kuchh aisa hai
कविता -जीवन ही कुछ ऐसा है जीवन ही कुछ ऐसा है समझो दुःख के जैसा है सोंचते हो सुख है जीवन कभी नही यह वैसा है। देख ले पापा का जीवन जीना स
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क्योंकि मैं दिसंबर हूं
कविता -क्यों कि मैं दिसम्बर हूं कपकपाती बर्फीली साल की अंतिम शर्मीली ठंड भरी अंबर हूं क्योंकि मैं दिसंबर हूं। पड़ते सर्दी का �
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