मेरे मन की तू आवत्री, मेरे घर की तू सावत्री
कभी निंदो में आती है, कभी बातो में बहाती है|
नजर अंदाज कर सोचे तो तेरी याद आती है
कभी तू तन को � read more >>
तुमने मुझे..खो दिया...
ठीक वैसे ही..जैसे 'बसंत' में
'पेड़'..खो देता हैं 'पत्तों' का साथ...
या वैसे..जैसे रह जाता है..
एक 'बूंद' तन्हा...'शाखों' पर
'ब� read more >>
मैं क्या गई आपको छोड़ के
आपने तो मुझे क्या ,मेरी
यादों को भी कहीं दूर दफना दिए
सोची थी ,कुछ देर की बात है
हम संभल जाएंगे
पर क्या पता था क� read more >>