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दिनाक-(29-11-2022) शायार लेख-(मोहम्मद फैजान सिद्दिकी पिता- रईस अहमद सिद्दिकी) read more >>
दिनाक-(29-11-2022),,," शायार लेख-(मोहम्मद फैजान सिद्दिकी पिता- रईस अहमद सिद्दिकी) read more >>
दिनाक_29-11-2022) शायार लेख-( मोहम्मद फैजान सिद्दीकी पिता- रईस अहमद सिद्दीकी) अरे वा किया जामाना आगया हैं। अरे वा किया जामाना अगया हैं। read more >>
लड़की :- नज़र मिली पहली बार मिलते ही हो गई इज़हार हुआ पहली बार इक़रार दिल का ऐसी ख़ुमार तेरे लिए कितना मैं बेक़रार रखन read more >>
मंजिल को पाने आया हूँ मंजिल को पाकर जाऊंगा नेक इरादे ओर सच्ची मेहनत से कुछ करके दिखलाऊंगा मंजिल को पाने आया हूँ मंजिल को पाकर जाऊंगा � read more >>
मंजिल को पाने आया हूँ मंजिल को पाकर जाऊंगा नेक इरादे ओर सच्ची मेहनत से कुछ करके दिखलाऊंगा मंजिल को पाने आया हूँ मंजिल को पाकर जाऊंगा � read more >>
मंजिल को पाने आया हूँ मंजिल को पाकर जाऊंगा नेक इरादे ओर सच्ची मेहनत से कुछ करके दिखलाऊंगा मंजिल को पाने आया हूँ मंजिल को पाकर जाऊंगा � read more >>
Namaskar doston main Shivam Singh aap sabhi ka swagat Abhinandan karta hun mere blog per mere sath Jo bhi ho raha hai meri jindagi mein main aap logon ke sath use share karna chahta hun main logon Ko yah batana chahta Hun ki khushhal jindagi is tarah se kisi ki galatfahmi ki vajah se barbad ho sakti hai maine jivan mein bahut sare Sukh dekhen bahut read more >>
हम न आस्तिक है न नास्तिक हम तो केवल वास्तविक हैं..... जो अच्छा लगे उसका ग्रहण करो जो बुरा लगे उसका त्याग करो.... फिर चाहे वो विचार हो, कर्म ह read more >>
Jeevan ko karke mere, Awsaadgrast parmatma Nahi koi jivan me mere, Ab chah rahi parmatma Saari sano Saikat ab bhul chuka parmatma Na koi mera nakoi tera jivan ki hai reet yaha Na ab rahi eak duje se Kisi ko koi preet yaha Chhod diya hai mujhko bhi Karke khub badnaam yaha Aaj maje lekar hasta hai Ye sara jaha Maine kisi ka bigada read more >>
है राही तू मंजिल का तो क्यों राहों में भटकता है है यकीन खुद में तुझे तो क्यों दुनिया की सुनता है लोगों के कहे में न जाने क्यों पड़ता � read more >>
मैं वो मुस्लमान हूं जो दिवाली की बधाई देता हूं मैं वो मुस्लमान हूं जो दिवाली की मिठाई खाता हूं मैं वो मुस्लमान हूं जो दिवाली पे तोहफे � read more >>
तू बस इरादों में बुलंदी रख.... उड़ने के लिए तो पूरा आसमां पड़ा है।। - अंशिका अग्रवाल read more >>
He jivan ki raag Nandani Kardo naya savera tum Bhardo khushiya jivan me mere Bhar bhar ke aashu diye hai mujhko Jivan me khub rulaya hai Ab to khusiyo kijholi bhardo Hamne hath failaya hai Jan jan man man bachche budhe Sabne mujhe thukraya hai Kardo krapa mere jivan par Tumne hi sath nibhaya hai Eak bachcha aur Biwi meri Chhota pariw read more >>
शाईरी- देश, प्रेम दिनांक 30-11-2022, (बिस्मिल्लाह हिररमा निररहिम) या अल्लहा. हु या रैमान तूमारी बरकत से तीस कलाम हम सभी भारत वासियो पे करदो � read more >>
ये दिल बच्चा ही अच्छा है, प्यार सच्चा ही अच्छा है ,, जो तुमको इश्क़ हो जाए, कि मिलना रिस्क हो जाए,, दिमाग़ होता मतलबी है, हमेशा दिल की ही read more >>
Namaskar doston baat use samay ki hai Kareeb 2018-19 ki main Surat kamane ke liye gaon ke ladkon ke sath gaya tha vahan per doston ke sath kam dhandha Karta tha Surat mein yah company hai SBS private naam ki jo ki plastic ki boriyon mein lamination lamination ka kam karti thi main Golu Sani Amit Rahul Gupta Ji chacha bahut sare ladke vahan hamare g read more >>
अध्यात्म के बिना मानव जीवन अधूरा है।तमाम सांसारिक उपलब्धियों,धन,ऐश्वर्य एवं सुख भोग के साधन भी अंतरात्मा की पिपासा को शांत नहीं कर स� read more >>
मुस्कुराकर वो मौहब्बत में रुला जाते हैं दर्द सीने कई तुफान उठा जाते हैं तेरी यादों के बसीले से ऐ मेरी मां हम हर रोज़ खुलके मुस्कुरात� read more >>
मौत की गोद मैं सो हमको बुला जाते हैं उनकी यादें हमें आंसू बनके रुला जाते हैं जाने कैसा सबब है जुल्फों की अंगड़ाई में वो वेबफा कहकर भी म read more >>
ख़ौफ़ (कविता) सर्द मौसम था चाँदनी रात थी दूर गगन में तारे चमक रहे थे! कड़ाके की ठंड से जैसे ठिठूर रहे थे, चांद बादलों में बार -बार छिपा � read more >>
आगमन नये साल के आगमन पर आओ कुछ कर दिखलाएं। वक्त बने तारीख़ हमारा। युग बने पहचान।। मौत बने जिंदगी हमारी। जिंदगी बने मिशाल ।। नये read more >>
कविता - ( ग़ज़ब ) नेता जी की देखो ! क्या ग़ज़ब की बात !! जीतने से पहले सेवक ! जीतते ही सरताज !! नेता जी की देखो ! क्या ग़ज़ब की बात !! याचक बनक read more >>
लज्जा लज्जा का सीधा साधा और शाब्दिक अर्थ है शर्म। और शर्म कब आती है जब हम एक मानक स्तर से जो अभी तक व्यवहार में था उससे कहीं नीचे गिरते read more >>
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