कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निर read more >>
तर्ज़=>सरकी सर जो धीरे धीरे,मे पागल हुआ रे में धीरे धीरे
टेक=>ला ला ला ला
निकली जो घर से धीरे धीरे,छुप गया रे वो तो धीरे धीरे
ये गुजरिआ... � read more >>
तर्ज=>
शीशे का था दिल मेरा हाय,पत्थर का जमाना था दिल टूट गया
जिनका हाथ में हाथ था हाय,मुझे कुछ सिखाना था साथ टूट गया!
(नाम) तुमने भला ह� read more >>
कहानी- "अनोखा बैर"
लेखक- जितेन्द्र शर्मा
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गोवर्धन चौधरी और बालकिशन मिश्र एक दूसरे के जन्मजात पड़ोसी थे। एक दूसरे के सुख-दुख में read more >>
एक नजर जो पड़ी उन पर तो ये नजर भी रुक गयी ।
उसने एक बात तलक न बोली पर दिल में डायरी छप गयी।
वो दिखाना चाहते थे हमे अपना गुस्से से लाल चेहरा � read more >>
मानव तन के दो रूप,
प्रथम देह का- अंत।
दूजा है प्राण- अनंत,
पल दो पल का साथ।।
मानव देह गुण अनेक,
स्वयं का ज्ञान मूल।
अंत से अविनाशी तक,
वि� read more >>