शहर मैं जब आया ,
थोड़ा सा घबराया ,
देख उसकी भव्यता को,
मन मेरा सकुचाया,
मन मेरा उदास था ,
घर न मेरे पास था।
पर मुझपे भी जिम्मेदारी थी।
मां read more >>
ना कोई नसा , ना कोई लत
ना ही किसी से बैर......
करते वो खुद अपना काम
और साथ ही बटाते घर में हाथ......
देते सम्मान बेटियों को , कभी ना करते फर्क
जि� read more >>
लाल लाल,हम सब हैं लाल ।देव भी लाल, दानव भी लाल,हम सब हैं लाल लाल।।देव तो कुमकुम से लाल,दानव तो रक्त से लाल,हम सब हैं अपनी खुशी में लाल ‌‌ read more >>
लेख- अनुपम सूक्तियां।
लेखक- जितेन्द्र शर्मा।
08/05/2023
निवेदन- किसी रचना से कुछ ऐसा अमूल्य निकलता है जिसको संकलित करना कभी कभी बहुत उपयोग� read more >>
जब आंख खुली तो मां की गोदी का एक सहारा था,
उसका आंचल मुझको भूमंडल से प्यारा था ,
उसका स्तन पान किया तो मैंने जीवन पाया था,
मुझको बढ़ता दे� read more >>
स्वरचित रचना---जुबां खामोश कहती है!
संदर्भित- ( At the deep love)
जुबां खामोश कहती है,
कहीं तो कुछ तो ऐसा है!
गुम हुआ होश कहता है
कहीं तो कुछ तो ऐसा � read more >>
स्वरचित रचना--- दूर हो या पास..........
संदर्भ--- दोस्ती!
दूर हो या पास
दोस्त तेरा अहसास!
बस मेरे लिए खास!
तू सलामत है तो,
मुझमें सलामत है सांस!
� read more >>
अक्सर लोगों से सुना हैं जिंदगी चार दिन की होती है पर गलत कहते हैं क्योंकि जब ईश्वर का बुलावा आता है ना, तो जिंदगी कुछ सेकंड की हो जाती है� read more >>
स्वरचित रचना- हे नारी शक्ति तेरी महिमा,.............।
संदर्भ--- नारीशक्ति वंदना
हे नारी शक्ति तेरी महिमा
मैं किन शब्दों में गान करूं।
हे आदि � read more >>