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क्यू रोता है ऐ-नीर, यहां पंख निकलते ही परिंदे उड़ान भरते है, . भनक लगी है तेरी खनक की उन्हें, तभी वे दरिंदे कान भरते है, . और ये जो रिश्तो के � read more >>
मत दिखा मुझे ये तेरी शोहरत के पन्ने, उन्ही पन्नो की किताब हूँ मैं, . तू सूंघ रही है जिन महुआ के फूलो को, उन्ही से बनी शराब हूँ मैं, . और तुझ read more >>
कोई फिर से मेरा बचपन दिला दो, वो कपड़े की गेंद, लाठी का बेट, छोटी से मैदान में, टीमें हो जाती सेट, वो भरपूर मजा क्रिकेट का दिला दो, कोई फिर स read more >>
सारे गुलिस्तां की खुशबू संग लेकर आए वो चांद, तारे, फ़ूल, जादू सब लेकर आए वो read more >>
■★■★■★■★■★■★■★■★■★■★■ *🌳🦚प्रेरक कहानी🦚🌳 *💐💐ईश्वर का चक्रव्यूह💐💐* #सपनों का सौदागर.......करण सिंह# ■★■★■★■★■★■★■★■★■★■★■ 👏👏👏👏👏� read more >>
हिन्दी प्यारी सुन्दर भाषा है, हमारी राष्ट्रीय भाषा हैं, हमारी मात् भाषा हैं, हिन्दी सबसे सरल भाषा हैं| read more >>
स्वरचित रचना--- हो रहा यह कैसा ‌विकास..................। संदर्भ---राजनीतिक व्यंग हो रहा यह कैसा ‌विकास ? न कोई ध्यान दे रहा है। दे रहा कोई लैपटॉ� read more >>
स्वरचित रचना- यह देश सुधरने वाला है? संदर्भ--- राजनीतिक व्यय यह देश सुधरने वाला है?-2 जहां नीचे से लै ऊपर तक, सब घूस पै चलने वाला है। यह दे� read more >>
स्वरचित रचना--- सितारों की दुनिया से ... संदर्भ- प्यार-मोहब्बत! सितारों की दुनिया से चल करके कोई मेरे दिल में आकर गया बस है कोई! हजारों न� read more >>
मेरी माँ के घर के दीपक से , ये सूरज फीका लगता है | मेरी माँ के घर के आँगन से , मुझे यह शहर छोटा लगता है || हम लाख कमा ले दुनिया ज़हान की सारी दौल read more >>
स्वरचित रचना--- वह तो मजदूर है ....! संदर्भ--- मजदूर जिनकी पेशानी के बल पर इस संसार की संरचना होती है। ऐसे उन असंख्य मजदूरों की पीड़ा में य read more >>
★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★ *संकष्टी तिल चतुर्थी व्रत-* 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर....करण सिंह💐 ★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★ 👌 *संकष्&z read more >>
स्वरचित रचना---आओ सुनाएं.........! संदर्भ--- श्री रामकथा। आओ सुनाएं तुमको रामकथा बड़ा प्यारा। !!टेक०!! भटके हुए लोगों सुन लो, होगा कल्याण तुम� read more >>
स्वरचित रचना--- किसी से कोई प्यार नहीं करे....! संदर्भ---प्यार-मोहब्बत दिल देता है रो-रो दुहाई, किसी से कोई प्यार न करे! बड़ी महंगी पड़ेगी ज read more >>
स्वरचित रचना--- गोलियां अइंठा न बदनिया..! संदर्भ--- एक अवधी/भोजपुरी लोकभाषायी निर्गुण रचना। गोरिया,अइंठा न बदनिया, ससुरे जाइ का परी। टे� read more >>
स्वरचित रचना--- एक दर्द होता तो....! संदर्भ--- दर्द एक दर्द होता तो सह लेते हम। एक बेदर्द होता तो रह लेते हम। पर यहां तो पड़ा हू read more >>
भगवान भोलेनाथ के श्रीचरणों में, सादर साष्टांग निवेदित, स्वरचित लोकभाषायी अवधी रचना। ----------------------------------------------------- हथवा त्रिशूल,डमरू,नन्दी पे read more >>
स्वरचित रचना- दिल अपना हिंदुस्तानी है। संदर्भ--- हिन्दुस्तानी परिचय अब तुमको हम क्या बतलायें, हम कितने read more >>
स्वरचित रचना--- लगा दे आग जो पानी में..! संदर्भ--- हिन्दुस्तानी लगा दे आग जो पानी में, जवानी read more >>
स्वरचित रचना--- क्यूं जले पर छिड़कते...! संदर्भ- प्यार-मनुहार क्यूं जले पर छिड़कते नमक हो प्रिये। एक तो मारा हूं वैसे ही प्यार का, दूजा त� read more >>
स्वरचित रचना--- प्यार किया है तो..! संदर्भ--- प्रेम ही ईश्वर है! प्यार किया है तो , क्यों रिस्क से डरें। मरना तो एक दिन है ही, तो क्यों न इश्� read more >>
जिनके माँ बाप नहीं होते, उनकी किस्मत में धक्के होते हैं, लोगों को शर्म भी नहीं आती, उनको ही सताते है| read more >>
वेदर्द है जमाना, दूसरे के दर्द को नहीं समझता है, होता है कुछ लोगों का दिल पत्थर, दूसरे के दु:ख पर ये जमाना हंसता हैं| read more >>
आंखों में आंसू देखकर भी, लोग ओर रुलाने की कोशिश करते हैं, किसी के हालात कोई नहीं समझता, उसे ओर तोड़ने की कोशिश करते हैं| read more >>
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