कहानी- इच्छा मृत्यु
लेखक- जितेन्द्र शर्मा
08/01/2023
लाला कृपाराम भले आदमी थे। उनकी एक छोटे नगर में दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं की बडी read more >>
स्वरचित रचना- कुछ मन की, कुछ मन के विचार!
संदर्भ-अजनबी प्यार !
*देखा न हाय रे, सोचा न हाय रे!
रख दी निशाने पे जान!
कदमों में तेरे निकले मेरा read more >>
ताउम्र जिस घरौंदे को ,
संवारने में निकाल दी ।
सब उड़ चले मुझे भी,
निकलने की सलाह दी।
जाओ..... सब के सब
मर्जी तुम्हारी,
आंखों में दिख रही
ख� read more >>
तेरा नाम ही क्यों ये दिल रटता है,
क्यों ये दिल सिर्फ तुझ पे ही मरता है,
न जाने कितना नशा है तेरे इश्क में,
अब तो तेरी याद में ही ये दिन क� read more >>
दिल के कोने से एक आवाज़ आती है
हमें हर पल उनकी याद आती है
दिल पूछता है बार – बार हमसे
के जितना हम याद करते है उन्हें
क्या उन्हें भी ह� read more >>
छोड़ना ही था तो आए क्यूँ थे... ??
जब छोड़ ही चुके, थे तो आये क्यूँ हो...??
आवाज मेरी कहीं मर सी गई थी बरसो पहले बहुत शांत रहती थी खुद को कहीं दफन� read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................!
संदर्भ---गम ए जुदाई
जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा।
आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा
आज बादल उमड़ पड़ read more >>
स्वरचित रचना- ए हिन्दुस्तान है,.............।
संदर्भ---राजनीतिक व्यंग
ए हिन्दुस्तान है,
जहां न्याय टिका सबूतों पर,
सबूत लाओ,
तभी सरकार यहां स read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ
मेरे कल्पित विचार
मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ,
तु� read more >>