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स्वरचित रचना- कहा राधा ने इक दिन, बांसुरी से.... संदर्भ--- प्रेम कहा राधा ने इक दिन, बांसुरी से, सुन ऐ बांसुरी? read more >>
कहानी- इच्छा मृत्यु लेखक- जितेन्द्र शर्मा 08/01/2023 लाला कृपाराम भले आदमी थे। उनकी एक छोटे नगर में दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं की बडी read more >>
स्वरचित रचना- कुछ मन की, कुछ मन के विचार! संदर्भ-अजनबी प्यार ! *देखा न हाय रे, सोचा न हाय रे! रख दी निशाने पे जान! कदमों में तेरे निकले मेरा read more >>
ताउम्र जिस घरौंदे को , संवारने में निकाल दी । सब उड़ चले मुझे भी, निकलने की सलाह दी। जाओ..... सब के सब मर्जी तुम्हारी, आंखों में दिख रही ख� read more >>
इश्क बिना जिंदगी फ़िज़ूल है, लेकिन इश्क के भी अपने उसूल है, कहते है इश्क में है बहुत उल्फ़ते, जब तेरे जैसा हो साथी तो सब कबूल है। read more >>
इन आँखों से उनकी तस्बीर को कैसे हटाये, इस दिल से उनकी यादें कैसे मिटाये, हम उन्हें कैसे भुला सकते हैं, इन धड़कनों को उनके बिन अब कैसे च� read more >>
तेरा नाम ही क्यों ये दिल रटता है, क्यों ये दिल सिर्फ तुझ पे ही मरता है, न जाने कितना नशा है तेरे इश्क में, अब तो तेरी याद में ही ये दिन क� read more >>
ज़िन्दगी में कोई टूटे तो उसे सम्भालना सीखो, ज़िन्दगी में अगर कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो, ये रिश्ते बड़े किस्मत वालों को मिलते हैं, ज़िन्� read more >>
दिल के कोने से एक आवाज़ आती है हमें हर पल उनकी याद आती है दिल पूछता है बार – बार हमसे के जितना हम याद करते है उन्हें क्या उन्हें भी ह� read more >>
ज़िन्दगी में कोई टूटे तो उसे सम्भालना सीखो, ज़िन्दगी में अगर कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो, ये रिश्ते बड़े किस्मत वालों को मिलते हैं, ज़िन्� read more >>
छोड़ना ही था तो आए क्यूँ थे... ?? जब छोड़ ही चुके, थे तो आये क्यूँ हो...?? आवाज मेरी कहीं मर सी गई थी बरसो पहले बहुत शांत रहती थी खुद को कहीं दफन� read more >>
वो साथी हो तुम मेरे जो ज़माने कि भीड़ मे भी खुद को रख के देखी हूँ अकेला महसूस नहीं कि हूँ तुम हमेशा ऐसे हि रहोगे किया ये दूनिया का सिर्फ सफ read more >>
मैं एक मासूम सी पक्षी मेरा ना कोई बसेरा है सूखा पतझार मिला जो उस पे हि मेरा बसेरा है मैं नन्ही मासूम सी पक्षी कोई ना यहाँ मेरा हैं जब आ� read more >>
तुम मुझे मनाते हो जब मैं रोना चाहता हूँ तो तुम मुझे हँसाते हो, जब मैं मरना चाहता हूँ तो मुझे जीना चाहते हो, जब मैं भौहें चढ़ाना चाहता read more >>
मुर्गे की बांक पर- उठ जाती अति भोर, धरती को करती- नमन तब रखती पांव। चल आंगन में- आकाश को करती प्रणाम, फिर झाड़ू-बुहार- बर्तन करती साफ।। read more >>
अंकुरते हैं- प्रेम हर एक दिल, पर खिलते नहीं- हर एक के दिल। खिल जाते- जिनके दिलों में यह, महक जाते- जीवन के ऐ-चमन।। -मोती read more >>
मतलब ने हमें मतलब के लिए बुलाया है मतलब ने बारे प्यार से बुलाया है मतलब का मतलब पूरा करने के लिए मैं बेमतलब का चली गई नजाने कब खत्म हो read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................! संदर्भ---गम ए जुदाई जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा। आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा आज बादल उमड़ पड़ read more >>
स्वरचित रचना- ए हिन्दुस्तान है,.............। संदर्भ---राजनीतिक व्यंग ए हिन्दुस्तान है, जहां न्याय टिका सबूतों पर, सबूत लाओ, तभी सरकार यहां स read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है, आसमां में रहकर भी धरा के करीब है, मैं लिख रहा हूँ मेरे कल्पित विचार मेरी लेखनी से, तुझ से ही करवाचौथ, तु� read more >>
दुनिया झूठी वो सच्चा हो एक लड़का सबसे अच्छा हो read more >>
एकलव्यी बाण मारती थी वो मेघदूती बाण मार रही है तू, वो तो शिरीष का था फूल जो टूट गया झट से, अब टहनी जो बची है उसे भी तोड़ रही है तू। read more >>
नफरत है मुझे खुद के किरदार से; वहम की कोई दवा नही होती, वो कहती है कि मिट जाऊंगी तुझ पर; पर झुर्रियां कभी जवां नही होती, और जब चिल्लाती � read more >>
रखना इस दोस्ती को बरकरार कुछ ऐसे, भले ही बन जाना सावन पर रहना आषाढ़ के जैसे, और ये जो हसीन चेहरे चमकते है अंधेरी रातो में, उनके लिए गुला� read more >>
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