ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ मेरे कल्पित विचार मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ, तुझ read more >>
आज की युवा पीढ़ी होने के नाते मैं कुछ खुद के अपने विचार लिख रही हु जैसा की सब को पता है आज आधुनिकता इतनी के जाता बड़ गई है की हमे हमारी जि� read more >>
कहानी- "प्रतिशोध या प्रायश्चित?"
खण्ड- एक
कहानीकार- जितेन्द्र शर्मा
दिनांक- 10/01/2023
निवेदन- सम्मानित पाठकों! यह कहानी कुछ अधिक लम्बी � read more >>
⭐ कविता = इश्तहार
प्यार तो इश्तहार हुआ !
चमड़ी का बाज़ार हुआ !!
लैला-मजनू हीर-राँझा !
जुमलों में शुमार हुआ, !!
ये रिश्ता जो था पावन !
आज क्यों read more >>
कि खोया बचपन वो अपना हमें याद है,
इन गली रास्तो कि हि तो बात है|
कर लिए आज तक हमने जितने कर्म,
फल के मिलने का हमको भी अहसास है|
की जिंदगी � read more >>
# जो लोग जानते है सबर करना उसे वो चीज़ जरूर मिलती है
जो उसके नसीब मैं लिखा हुआ है
इंतजार के साथ सबर करना भी सीखें
जो आपका है वो आपको आता ह� read more >>
कब कोई तूफान बिना बताए
आपके ज़िन्दगी मैं आ जाये मालूम नहीं होता है .....!!
अगर कोई ऐसा हो
आपके ज़िन्दगी मैं हो जो तूफान का रुख बदल दे तो
तूफा� read more >>