पात्र:1.दादा जी(जिनका नाम बलकरन सिंह है), 2. संता (दादा जी का मित्र), 3.वीर(दादा जी का पोता),4. मिनी (दादा जी की पोती),5. सोनिया (दादा जी की नूह), 6, कर्� read more >>
मुझे आज भी वो दिन याद है। जिस दिन हमारे घर में पहली बार कुता आया था। वैसे तो हमारे परिवार में कुता रखना किसी को भी पसंद नही था । सिवाए मेर read more >>
बार-बार पता नहीं क्यों?
कुछ मैं लिखती हूं. फिर मिटाती हूं .न जाने क्या ?
मन की रहस्य को उजागर करना चाहती हूं "चाहती तो हूं कि लिख दूं 'अपन read more >>
आजकल हम बहुत शांत हो गए हैं
पर ऊपर से तो यह शांति सर्वविदित है
पर न जाने क्या मन में बहुत ही हलचल मची हुई है
जिसकी शोर से मैं अपने आप को � read more >>
कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर.
लाकर मुझे खड़ा कर देती है!
जहां से मैं मुड़ ,कर पीछे देखना भी नहीं चाहती हूं
मगर वह गुजरा हुआ पल, वह अतीत ,हम� read more >>
Dear ससुराल तुम मायके सा फिल करा पाओगे क्या,
बहु बनने का शौक नही मुझे अपनी बेटी बना पाओगे क्या,
Dear सासु मां में आपसे वादा करती हूं में आपको � read more >>
क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>
शीर्षक ---- तुम से दूरी
तुम समय के साथ मुझसे
दूर होते गए !
न जाने क्यों ?तुम मजबूर होते गए !
बहुत खामोशी के साथl
मैंने रिश्तो को संभालना च� read more >>
यो चांद सीकर में चमके सै, मेरा रूप गजब का दमके सै, मेरा नाचन का जी कर रहा सै। ओ डीजे वाले छोरे ऐसा सॉन्ग सुना दे न, मेरी पोरी पोरी मटके ऐसा � read more >>