क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>
कहानी- विद्योतमा
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी-20/01/2023
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पंडित कृपाराम मिश्र सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनका नाम सम् read more >>
____प्राण से बढकर तिरंगा ___
हमे तिरंगा प्राण से भी बढकर है
ये हमे स्वाभिमान का रंग लगे
उचाई पे फडका जो
लहर लहर लहरता वो
खुशीका कोई आज ना ठ� read more >>
ओ देश के विर पुत्रो,नव युवको
जागृक हो,सचेत रहो,भान रखो
कि भष्ट्राचार से,देश द्रोह से
देश दुबळा आज हो रहा
हम लाचार क्यो ?-2
याद करो वो क्र� read more >>
दफसली चूही= हमारे आस - पास हमें कई ऐसे लोग मिलते हैं जिन्हें तरह- तरह की बुरी आदतें होती हैं। जैसे कि झूठ बोलना, किसी की चुगली करना, किसी � read more >>
एक गांव में एक सरवन नाम का लड़का रहता था,,
बहुत ही सीधा और बहुत अच्छा था
गांव में उसके माता और पिता भाई और बहन लोग रहते थे ,, सरवन तीन भाई ए� read more >>
की.............
मुद्दत_ ए _तोहिम होगी मेरे इश्क की...
जिस दिन तुझ बेवफ़ा को, याद न करू
और जब निकल जाए अपना सिक्का खोटा
तो इस खुदा से क्या शिकायत क� read more >>