(रोला छंद)
चले न कोई जोर, करे मन हरदम अपना।
फिर भी अपनी सोच, पूर्ण करना है सपना।।
रखता सदा विवेक,तभी रहता मन काबू।
चलता अपनी राह, कहे मुझक read more >>
(दोहा छंद)
बेकाबू जब मन रहे,चले न कोई जोर।
देते रब को दोष तब,रखे भावना चोर।।
चले न कोई जोर तब,मन की जब हो बात।
पहले ही हम भाँप कर,कर लेते ख read more >>
कुछ सवाल है, कह सकती हूं कि बस यूँही, लेकिन क्या सच में बस यूही है, नही यू ही कुछ भी नही है। सालो से चला आ रहा, देखा गया, सुना हुआ है सब ।और सा� read more >>
(दोहा छंद)
दुख से बचे न राम जी, वक्त बड़ा बलवान।
सुख दुख आते ही रहे, देते रहते ज्ञान।।
दुख से बचे न राम जी, सुख दुख से है प्राण।
हारे कभी न read more >>
(दोहा छंद)
राजा हो या रंक हो,करिए कभी न अत्य।
दुख से बचे न राम जी, जीवन का यह सत्य।।
दुख से बचे न राम जी,जीवन का यह फेर।
मिले खुशी हर हाल मे read more >>
(दोहा छंद)
डरना कभी न चाहिए, और रहें बन तीख।
दुख से बचे न राम जी, हम सब लें यह सीख।।
दुख से बचे न राम जी,जीवन का यह फेर।
मिले खुशी हर हाल मे read more >>
(दोहा छंद)
नफा और नुकसान दो,पहलू ही है माप।
दिल से कर के काम को, रहें नफा में आप।।
नफा और नुकसान से, पहले डर मत यार।
धंधा को अब कर शुरू,जी� read more >>
(दोहा छंद)
दूर्जन से दूरी भली, लगा सके वह दाग।
कर सकता बदनाम भी, नहीं जानता राग।।
दूर्जन से दूरी भली, फँसा सके वह जान।
उलझन देगा आप को, कर read more >>
(दोहा छंद)
एक यही अरमान से, होगा जग में नाम।
चलें वक्त के साथ तो, जीवन हो गुलफाम।।
रहे जिन्दगी में खुशी, एक यही अरमान।
चलते चलिए कर्म से,� read more >>