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सदा सत्य की जीत है-होगा तब कल्याण
(दोहा छंद ) सदा सत्य की जीत है, होगा तब कल्याण। अति का अंत करीब है,रावण बना प्रमाण।। अति का अंत करीब है,वर्जित यह सर्वत्र। हद में रहना ह�
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अति का अंत करीब है-बड़ा द्रव्य संतोष
(दोहा छंद) अति का अंत करीब है,उत्तम मध्यम मार्ग। सदा रहे जो मध्य में,प्राण संगीत गार्ग।। अति का अंत करीब है,बड़ा द्रव्य संतोष। जिससे प
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बदले बदले लग रहे-वातावरण मिजाज
(दोहा छंद) बदले बदले लग रहे,मौसम क्यों है आज। गरमी में कर के मजे,सबको है नव नाज।। बदले बदले लग रहे,वातावरण मिजाज। फिर भी दिल को चैन है,ह�
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हृदय हुआ है बाज-फिर भी दिल को चैन है
(दोहा छंद) बदले बदले लग रहे,वातावरण मिजाज। फिर भी दिल को चैन है,हृदय हुआ है बाज।। बदले बदले लग रहे,रंग भरी यह शाम। रौनक है बाजार में,जगह
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आमद बढ़िया है हुई-सभी हुए गुलजार
(दोहा छंद) आमद बढ़िया है हुई, सभी हुए गुलजार। बदले बदले लग रहे,अपना ही परिवार।। बदले बदले लग रहे,अल्हड़ सी यह रात। तारे भी आकाश में,करत�
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करिए कभी गुमान मत-दो दिन के मेहमान
(दोहा छंद) करिए कभी गुमान मत, दो दिन के मेहमान। जीवन में जब शान हो,करते याद जहान।। खूब जिन्दगी है मिली,बनें भव्य इंसान। इसका रखना मान ह�
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खूब जिन्दगी है मिली-इसका रखना मान
दोहा छंद) खूब जिन्दगी है मिली,बनें भव्य इंसान। इसका रखना मान है,दो दिन के मेहमान।। दो दिन के मेहमान सब,होते नहीं निराश। जीवन का कुछ लक
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जीवन का कुछ लक्ष्य है-जिसमें भरे प्रकाश
(दोहा छंद) दो दिन के मेहमान सब,होते नहीं निराश। जीवन का कुछ लक्ष्य है,जिसमें भरे प्रकाश।। दो दिन के मेहमान है,जीवन का यह डोर। हरदम रखि�
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जीवन का कुछ लक्ष्य है-जिसमें भरें प्रकाश
(दोहा छंद) जीवन का कुछ लक्ष्य है, जिसमें भरें प्रकाश। दो दिन के मेहमान सब,होते नहीं निराश।। दो दिन के मेहमान है,जीवन का यह डोर। हरदम रख
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हरदम रखिए सादगी-खोए कभी न भोर
(दोहा छंद) हरदम रखिए सादगी, खोए कभी न भोर। दो दिन के मेहमान है,जीवन का यह डोर।। दो दिन के मेहमान हैं,हम सब सारे जीव। रखिए उलफत पास में,मि
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समझे जो सब मर्म को-पाते हैं अनुराग
दोहा छंद) अपनी अपनी धारणा,से चलते हैं लोग। चाहत को जो जन रखे,करते हैं सब भोग।। अपनी अपनी धारणा, अपनी अपनी राग। समझे जो सब मर्म को,पाते �
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मिले खुशी तब आपको-जीवन भर हो प्यार
(दोहा छंद) मिले खुशी तब आपको, जीवन भर हो प्यार। अपनी अपनी धारणा,रखें हृदय उदगार।। अपनी अपनी धारणा,वैसी ही हो कांति। रहे सितारे दृढ़ सद
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रहे सितारे दृढ़ सदा-झिलमिल रहती शांति
(दोहा छंद) रहे सितारे दृढ़ सदा,झिलमिल रहती शांति। अपनी अपनी धारणा,वैसी ही हो कांति।। अपनी अपनी धारणा, अपनी अपनी चाल। वैसा ही परिणाम ह�
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दिनों तक पहुंची नहीं-उनकी जो है चाह
(दोहा छंद) दीनों तक पहुंची नहीं,उनकी जो है चाह। खा जाते हैं बीच में, और दिखाए राह।। दीनों तक पहुंची नहीं, दिए हुए खैरात। लोकल नेता खा गए
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दीनों तक पहुंची नहीं-जीवन की सब प्रीति
(दोहा छंद) बड़े बड़े होते चले,इनको मिले न मुक्ति। दीनों तक पहुंची नहीं, सब साधन की युक्ति।। दीनों तक पहुंची नहीं,जीवन की सब प्रीति। अप
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अपने मन को कोसते-उनकी यह है रीति दीनों तक पहुंची नहीं
(दोहा छंद) अपने मन को कोसते,उनकी यह है रीति। दीनों तक पहुंची नहीं, जीवन की सब प्रीति।। दीनोंं तक पहुंची नहीं,सुमन खुशी की आस। दोषी किस�
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अधिकार के लिए प्रखर होना होगा
(कविता छंद) अधिकार के लिए प्रखर होना होगा, हड़प वाले को जवाब देना होगा। अभी भी वक्त है जागो मेरे दीन, आगे बढ़ो अपनी बातों को रखिए। चुप
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बछड़े कि हरकत-आंगन में उछल कूद
शाम का समय है बछड़ा घर से बाहर है।हर जगह खोजें लेकिन कहीं नहीं मिला। घर के सामने लगे निंबु के पेड़ के पास कुछ हिलने कि आवाज सुनाई दी। मा�
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मम गुरु
वदान्य प्रबल दृष्टांत सकल ! एकांत शून्य सा चारु विदल!! मन से निश्च्छल् ध्वनि में तरुदल! वक्तव्य नाद सा करे विकल!! है तीक्ष्ण तेज जैसे �
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मम गुरु-वदान्य प्रबल दृष्टांत सकल
वदान्य प्रबल दृष्टांत सकल ! एकांत शून्य सा चारु विदल!! मन से निश्च्छल् ध्वनि में तरुदल! वक्तव्य नाद सा करे विकल!! है तीक्ष्ण तेज जैसे �
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गुरुपौर्णिमा-गुरू असतात यशाचे शिल्पकार
गुरुपौर्णिमा...🌷💫 🙏गुरू असतात यशाचे शिल्पकार गुरू देतात जीवनाला आकार... पावले असतात दिशाहीन त्याला मार्ग दाखविते बुद्धी गुरुंमु�
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मैं भूल गयी-उन पन्नों को जिसमें बस दर्द तुम्हारा था
मैं भूल गयी उन पन्नों को जिसमें बस दर्द तुम्हारा था कितना आंखों को धुलती जो हरदम बहती धारा था। जितना मैं स्वर्णिम सुख की आश किया करत
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हंसने की अभिलाषा है-एकबार हंसा कर देखो
हंसने की अभिलाषा है एकबार हंसा कर देखो मेरे मोती चुन चुन कर एक बार सजा कर देखो। सुप्त हो गयी लहरें तो जलधि कहां कहलाओगे अपनी लहरों म�
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मायावी संसार है-सबका अपना दाम
(दोहा छंद) मायावी संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। मायावी संसार है,गुर सब ले ले यार। और बता दे ज्ञान से,
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