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दिप्त्त दीप दान का, अभिमान नम करी! स्वेच्छ, ऊज्वला करी, चिरागों कि रौशनी!! ‌‌‌‌ विकाश का पवन बहे, अवकाश वक्त से! दिप्त्� read more >>
खुशी पर्व नवरात्रि की,पावन आया वक्त। माता के नौ रूप से,लहर चले है रक्त।। प्रथम शैल पुत्री तुझे,करूं नमन मैं खास। पूरे कर अरमान सब,और ब� read more >>
Once upon a time, in a quaint village nestled between rolling hills and meandering streams, lived two siblings, Anika and Aarav. They shared a bond that was as strong as the ancient banyan tree standing tall in the village square. Every year, on the auspicious day of Bhaiya Dooj, Anika would eagerly await her brother's return from the city. Aara read more >>
वक्त, जो बिता इश्क का अन्दाज़ बदला । आज - कल कहाँ ! वो ,तेरे नाम के लिफाफे ,आते है। read more >>
ये, खावाईशो कि आंघीयाँ ले उडी़ बादशाहों की नींद, और परिन्दों के घर........ दर-दर भटक रहै है। आज भी मुहोबतों के वाशिन्दे , के, ऊमीद, मे उजड़ ग� read more >>
"जिंदगी के इस राह में- युगों-युगों से चले आ रहे हैं"! "ना जाने- कितने ही मुसाफिर, यहां भटकते आ रहे हैं"! "देखो कोई- ए-बिरला ही पहुंच, पाता अ read more >>
आज की दुनियाँ में धोखे बाज कम नहीं, बाहर से दिखे मासूम अंदर वह विष रखे। बातें प्यारी-प्यारी करें और कर लेता वश में, फिर कर देता है अपन� read more >>
ना घबराना आई मुश्किलों को डट के करना सामना इन मुश्किलों से एक न एक दिन तो मरना ही है। क्या घबराना इस मौत से है ऊपर बैठा भगवान उसको पता read more >>
ना घबराना आई मुश्किलों को डट के करना सामना इन मुश्किलों से एक न एक दिन तो मरना ही है। क्या घबराना इस मौत से है ऊपर बैठा भगवान उसको पता read more >>
अब, अंदाज भी बिक ने लगे है । बेड़े, बिन्दास अन्दाज़, मे, हुआ, ये चमत्कार , तब । जब, खुदगर्जो की भीड़ मे उसने , सीने से लगाया । वो ,परवदी read more >>
न जाने राही- कितने इस राह पर... एक कहानी- बन जाते इस राह पर... ज़िंदगी सुलझता- नहीं उलझता जाता है यहां... भटकता- जीवन गुज़र जाता ए-कहां?... -� read more >>
वो परदेसिया- तू कहां इस देश में, कोई न तेरा- तू कहां इस देश में, आया कहां से जाना- कहां वो परदेसिया तू कहां,, जीवन- दिन चार यहां तू परदे� read more >>
ये जवानी दीवानी- दो दिन की है कहानी, ये बुलबुल पानी का- पल-ए-पल की है कहानी, ये इतराता- यौवन भूल जाता, कुदरत का अनमोल तोहफा,, ये देख तू � read more >>
हम मां- बाप के प्रेम में पलें, हम फ़ूल- उनके प्रेम में पलें, हम साया- वो हर ग़म रहे कोसों दूर,, ईश- हमारा ए-ग़म रहे दूर....!!!! -मोती read more >>
"तू नहीं तो जीवन- में एक सुना पन है"! "लगता है ए-जहां- में कहीं सुना पन है"! "ये तुम्हारी याद- अब दिल से जाती नहीं"!! "कभी ये सरगम- लिखा था क� read more >>
मंत पुँछ, नशें मे, ... .. कैसे सालों तक मैं जीया ? हवा मे उड़ते छल्ले से ये घुंऐ के गुंबार किस्मत की बेरुखी , और अपनो के तानों ने ये नायाब श read more >>
टूट न जाए दिल छोड़ दे धोखेबाजों कि महफ़िल, तेरे जैसे सच्चे मिलना नहीं है मुश्किल, दुख के करीब ना आने दे दिन छोड़ दे धोखेबाजों की महफिल। read more >>
बादशाहों,या दूसरों के रहमों कर्म पर, या बुजदिल बन के जीने से अच्छा है। किसी रास्ते का पत्थर बन के जीओ । जब भी,किसी को ढोंकर लगेगी। दुआ� read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जलता दीपक आस का,हृदय चाहता खास। लब से निकले प्रेम ही,मिटे सभी की प्यास। सफल भव्य किरदार स read more >>
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने को जो मानते,लगते हैं दिलदार। ऐसा दिल अब है लगा,करता दृढ़ किरदार। ऐसे दृढ़ किरदा� read more >>
#विधा:- मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया जोड़ी रात दिन,लिया बहुत ही दर्द। सबल किया परिवार को,बना रहा दृढ़ मर्द। हँसकर आगे को read more >>
#विद्या:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" ऐसी करनी कीजिये,बने दिव्य तूफान। सभी बुराई दे उड़ा,मन में भरे उफान। नशा मुक्त संसार ह read more >>
#विद्या:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" झूठ और पाखंड को,कर देंगे हम खत्म। सत्य धर्म से ही यहां,मिले अटल एकात्म। जगमग इस संसार read more >>
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" होगा भला समाज का,रखें एकता प्रीत। दूर भगाओ अब नशा,अपनाओ मृदु रीत। मानववाद विशेष है,उत्त� read more >>
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