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"मंज़ूरी" "हमें तुम में तुम्हारी मजबूरी नज़र आती है,तुम्हारी मुस्कुराहट में तुम्हारी मजबूरी नज़र आती है,जब भी तुम्हारे ज़िस्म को छूना read more >>
क्या कहूं आज मैं आप से। डरता मैं हूं बहुत पाप से। मैं प्यार का एक मस्त राही- डरूं नहीं कद की नाप से । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिं� read more >>
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,करते कुछ भी काम। आये जब परिणाम तो,लगता उसे लगाम।। करते नहीं विचार जो,औ read more >>
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,उसे बुद्धि है भ्रष्ट। उल्टे सीधे काम से,करे प्रगति को नष्ट। और गँवा� read more >>
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" उजला तन किस काम का,काला जब हो सोच। ऐसे जन सब ही यहाँ,करते रहते नोच।। उजला तन किस काम का,जिसक read more >>
घूंघट से करती वफा,दिलवर का दीदार। मिलती उसको तब खुशी, पाती है सब प्यार।। read more >>
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" छठ माई की शाम पर,सजा हुआ है घाट। पूजा पूजा मय हुआ,अनुपम है नव ठाट।। छठ माई की शाम है,आज सुह� read more >>
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,उसे बुद्धि है भ्रष्ट। उल्टे सीधे काम से,करे प्रगति को नष्ट। और गँवा� read more >>
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,करते कुछ भी काम। आये जब परिणाम तो,लगता उसे लगाम।। करते नहीं विचार जो,औ read more >>
क्या कहूं आज मैं आप से। डरता मैं हूं बहुत पाप से। मैं प्यार का एक मस्त राही- डरूं नहीं कद की नाप से । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिं� read more >>
चाहत भी नहीं अब तो ये दिल भी लगा बैठे तुझे अपना बना बैठे एक सपना सजा बैठे देखा जब ख़्वाब तेरा रातों को गवां बैठे तुझे अपना बना बैठे ए read more >>
चाहत भी नहीं अब तो ये दिल भी लगा बैठे तुझे अपना बना बैठे एक सपना सजा बैठे देखा जब ख़्वाब तेरा रातों को गवां बैठे तुझे अपना बना बैठे ए read more >>
अगर मैं तेरी होती तो कदर ना मेरी होती जमाने का है ऐ दस्तूर कड़वा है मगर सच है जरूर तुझको लगती हूं मैं प्यारी क्योंकि मैं हूं चीज पराई read more >>
जिंदगी भर का जख्म दे दिया तूने हमने तो कुछ पल की खुशी मांगी थी तूने तो कांटा बिछा डाला राहों में मेरे सीने से दिल निकालकर पत्थर का ब� read more >>
अक्सर हमने लोगों को कहते हुए सुना है । कि अरे !मैं करना तो बहुत कुछ चाहता था। परंतु मेरे पास समय नहीं था जैसे की कोई वह नया व्यापार, करन� read more >>
कुछ नही से अच्छा है , कुछ तो करना पड़ेगा ये जो जिन्दगी है ना जनाब इसे समझना पड़ेगा थक के हारेंगे नहीं हम आखरी तक अब तो हमे लड़ना पड़ेगा , read more >>
मैं अधूरे सफर का मुसाफिर हु, मंजिल तक हमे जाना है थक गए है चलते चलते पैर मेरे, इन पैरो का ये बहाना है कुछ करने का ठान लिया है मैने हमे कुछ read more >>
सोचता हु की क्यों ना हर घड़ी मै तुझसे प्यार करू तू जहा भी रहे मै ता उम्र बस तेरा इंतजार करू बेसक तू पास नही हैं मेरे,तेरे होने का मैं अहस read more >>
अभी जिया ही कहा मैने अपनी जिंदगी मेरी जिंदगी की अभी उड़ान बाकी है छोटे मोटे बहुत दे दिए हमने इम्तहान मेरी जिंदगी की अभी असली इम्तहान read more >>
मोम की तरह कुछ यूं पिघल रही है ये ज़िंदगी एक एक दिन हाथ से निकल रही है ये ज़िंदगी औरो को देख कर खुद की आग में जुलझ रही है ये ज़िंदगी जितन read more >>
पल पल तरसता था बस एक पल के लिए कास तू मुझे मिल जाय मेरे कल के लिए सोचता था कि तुझे मैं अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लू कम्बखत तू मिली भी मुझ read more >>
समाज मनुष्य को समाज के उपयोग में आने के लिए शिक्षित करता है। कोई भी समाज किसी भी मनुष्य की आत्मिक विकास की चिंता नहीं करता है, यह विकास � read more >>
संघर्ष के बाद समाज कि स्थिति असंतुलित हो जाती लगभग सही क्षेत्रों मे कमोबेश अभाव का ही मंजर होता है। सारे नुकसान कि एक साथ तत्काल भरपाई read more >>
मेरे बचपन का गांव दिनांक 23/11/2023 ----------- आज कई वर्षों के बाद मुझे अपनी मायके के गांव जाने का अवसर मिला। जहां मेरा बचपन बीता था कुछ समय पश्चा read more >>
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