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देख रहां हु समझ रहां हु , हर इक इंसान झुटा हैं। झूट फरेब हर कोई करता सच का बस मुखोटा हैं।। झूट झट से पकड़ में आता मन मंदिर में कोई तोलें त� read more >>
कुण्डलिनी प्रकाश का दर्शन आज से लगभग 10 साल पहले की बात हे | अपनी ग्रेजुएशन पुण कर लेने के बाद में बैंक में कार्य करने लगा , इस हेतू में बू� read more >>
भक्ति की शक्ति: आज से लगभग 8 साल पहले की बात है , में एक नाई के पास जाया करता था सेविंग बनवाने वह मेरे से दुनिया दारी की बाते करता और में उस� read more >>
"मिट्टी की सोंधी खुशबू में बसी है ज़िंदगी, गाँव के उस कुएँ में अब भी बचपन पड़ी है, शहर की रफ्तार में बहुत कुछ पाया मगर, जो अपनापन गाँव मे� read more >>
फसलें लहराती थीं जिस आंगन में कभी, अब वहाँ ईंट-पत्थर के महल खड़े हैं, गाँव की गलियाँ मुझे अब भी बुलाती हैं, पर मैं मजबूरी के बोझ तले पड़े read more >>
बेरोजगारी आज के समय में हर युवा के लिए एक चिंता का विषय बन चुकी है। हर साल हजारों-लाखों छात्र डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में निकलते हैं, � read more >>
ब्लैक डे ब्लैक डे कैसा ब्लैक डे है हर कोई ब्लैक डे की डीपी लगाने में व्यस्त है ब्लैक डे उनका हुआ जिनकी जिंदगी वीरान हो गई, देश सेवा मे� read more >>
आवाज है दिल की अब कुछ नया हो। तेरा मेरा सफर कुछ इस तरह बयां हो।। कोई सागर का मोती तू जैसे मै लहर बन किनारे लाऊं। अक्स तेरा यूँ जब चमके त read more >>
एक हो सकेना हम क्यों लेती इसका घम प्यार के पंछी हम पर मिल सकेना हम ||धृ || एक हो सकेना हम.. संगीत.. मिले तो क्या डरना पर हालात है मुश्कि� read more >>
गाँव की पगडंडियाँ, बचपन की राहें, माटी की ख़ुशबू, खेतों की बाहें। पलाश के पेड़ों की छाँव निराली, सरसों के फूलों की चूनर मतवाली। चौपाल read more >>
वो मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू, वो खेतों की राहें, जहाँ हर सुबह उम्मीदों की किरणें हैं चाहें। नदी के किनारे वो रेत की बिछौनी, जहाँ बचपन ने ल� read more >>
गाँव की गलियाँ, वो बचपन की बातें, माँ की ममता, दादी की सौगातें। बिलकुल कच्ची पर दिल से पक्की, वो मिट्टी की खुशबू, वो अमर बेल की लच्छी। त� read more >>
न जाने क्यों शहर में आकर भी, मन मेरा वहीं ठहर जाता है, जहाँ सुबह ओस में भीगे खेत, और हवा में सोंधी ख़ुशबू आती है। जहाँ सूरज की पहली किरण, read more >>
गाँव – मेरी जड़ों की खुशबू नंगे पाँव वो पगडंडी, अब भी रुला देती है, जहाँ बचपन ने कंचों की दुनिया रची थी। वो कच्चे मकान की मिट्टी, जो हाथ� read more >>
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ� read more >>
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ� read more >>
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ� read more >>
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ� read more >>
ज़माने भर का ग़म उठाए फिरते हो क्या रंज है जो छिपाए फिरते हो कभी तो आओ देहरी पर हमारे हर गम को भूल जाओगे शब से पहले गर मुस्कुराओगे तो ज� read more >>
टूटे हुए अक्स समेटने मैं चला, अपनी कहानी लिखने मैं चला, अकेले चलने का हुनर है मुझमें, अपने वजूद को समेटते मैं चला, माज़ी की यादों को पीछे read more >>
टूटे हुए अक्स समेटने मैं चला, अपनी कहानी लिखने मैं चला, अकेले चलने का हुनर है मुझमें, अपने वजूद को समेटते मैं चला, माज़ी की यादों को पीछे read more >>
जो छूटा जहां उसको वही रहने दिया, सोचा नहीं जो हुआ उसे होने दिया; थम जाएं ऐसों से ख़ुद न मिलने दिया, समझाया खुद को न पैरवी करने दिया, अपना read more >>
जो छूटा जहां उसको वही रहने दिया, सोचा नहीं जो हुआ उसे होने दिया; थम जाएं ऐसों से ख़ुद न मिलने दिया, समझाया खुद को न पैरवी करने दिया, अपना read more >>
24 शिक्षा आओ शिक्षा के दीप जलाएं हम सब मिलकर पढ़े पढ़ाएं अंधियारे को दूर भगाएं हम सब मिलकर पढ़े और पढ़ाएं एक भी बच्चा छूटने न पा� read more >>
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