एक ,चेहरा नहीं ,लिख ,पाती हूँ,।
मगर ,साए से यह ख्वाहिशें ,मन ही मन ,
फिर वहीं ,याद गुनगुनाती हूँ,
निश्छल ही यह प्रेम ,अधुरा कहाँ,रहा,।
मगर भट� read more >>
परिस्थिति कभी एक समान नहीं होती आज खुशी है तो कल गम ।आज कहीं रौनक है तो कहीं मातम । कब ,क्या किसके साथ होगा यह किसी को नहीं पता।यही हुआ था read more >>