Notification

जरूरी कार्य के बजाए नए संसद-भवन का निर्माण-वीरेंद्र देवांगना

जरूरी कार्य के बजाए नए संसद-भवन का निर्माणःः
यह अजीब विडंबना है कि इधर कोरोना संकट का हवाला देकर लाखों पदरिक्तयों के बावजूद नई भरतियों, कर्मचारियों-अधिकारियों के महंगाई भत्तों पर विराम लगा दिया गया है, उधर 25 हजार करोड़ की लागत से नए संसद भवन का निर्माण कार्य चालू कर दिया गया है।
जबकि बेरोजगारी सर चढ़कर बोल रही है। करोड़ों बेरोजगार युवा सड़कों की खाक छान रहे हैं और माकूल काम के अभाव में या तो नशाखोरी कर रहे हैं या अपराधी बन रहे हें।
देश में बेरोजगारी का आलम यह कि अभी हाल छत्तीसगढ़ में चपरासी व चैकीदार के 15 पदों के लिए 25 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, उसमें भी उन आवेदकों की संख्या अधिक है, जो इंजीनियरिंग व एमबीए डिग्रीधारी हैं, जबकि निम्नश्रेणी के इन पदो ंके लिए शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास निर्धारित की गई है।
कमोबेश यही हाल सभी राज्यों का है। बेरोजगारी इस कदर बड़ी हुई है कि छोटे-से-छोटे पद के लिए बड़े-बड़े योग्यताधारी आवेदन देने के लिए विवश हैं। उन्हें इस बात का डर सताता है, जो वाजिब है कि नौकरी के अभाव में कहीं उनकी आयु निकल न जाएं। घर की माली हालत बिगड़ न जाए, इसलिए जो भरतियां होती है, उसमें किस्मत आजमाने लग जाते हैं।
केंद्र ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर 1 जनवरी 2020 से 1 जुलाई 2020 तक रोक लगा दी है। इनकी देखा-देखी राज्यों ने भी भेड़िया-धसान चालू कर दिया है। इधर महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही है, उधर कर्मचारियों का जीवन महंगाई से दुभर हो रहा है। केंद्र में जहां 50 लाख कर्मचारी व 61 लाख पेंशनभोगी हैं, वहीं 20 लाख से अधिक सेवारत व सेवानिवृत्त सैन्य परिवार हैं। राज्यों का मिला दें, तो यह संख्या करोड़ों में है।
यही नहीं, केंद्र ने आर्थिक संकट का रोना रोकर राज्यों का 2.35 लाख करोड़ रुपया जीएसटी लटका रखा है। इस बाबत तेलंगाना, दिल्ली, तमिलनाडु व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है कि विकास कार्यों के लिए उन्हें पैसा चाहिए।
केंद्रीय सरकार ने स्वयं अपै्रल 2020 व जून 2020 को दो आदेश जारी कर 17 मंत्रालयों को छोड़कर बाकी मंत्रालयों के खर्च में 40 फीसदी की कटौती कर रखी है।
इन्हीं तथ्यों को इंगित करते हुए आल इंडिया सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव पीएस नायर का कहना है,‘‘सीआरपीएफ की दिल्ली सहित कई बिल्डिंग जर्जर हो रही है, लेकिन कोई उसे बनाना नहीं चाहता। सैनिकों को सेवानिवृत्ति पर भुगतान लंबित है। रिटायरमेंट के बाद एक्स सर्विसमैन को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। सरकार ने डीए व डीआर रोक रखा है। जबकि संसद भवन बनाने के लिए रुपया है, गोया वह जर्जर होकर बैठने के काबिल नहीं बचा है।’’
इस बाबत विपक्ष ने भी मांग की है कि सेंट्रल विस्टा के नाम से संचालित नए संसद भवन निर्माण का प्रोजेक्ट महंगा होने व कथित आर्थिक संकट के चलते रोका जाए।
वर्तमान में संसद भवन बनाना जरूरी नहीं, बल्कि सेटेलाइट लांच कर वैज्ञानिक शोध करना, खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां करना, कर्मचारियों-अधिकारियों को महंगाई भत्ता व महंगाई राहत देना जरूरी है, जो देश को विकास के राह पर ले जाने का महती कार्य करते रहते हैं।
–00–

Leave a Comment

Connect with



Join Us on WhatsApp