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बारिश की बूँदे फिर उलझन मे है खुदा जाने अब की बार कौन सी सुलझन में है।। read more >>
ढलती शाम मेरे शहर को भी आबाद कर इस बार मेरा थोड़ा ख्याल तो कर ।। read more >>
खुदा थोड़ा रहम फरमाए कोई बंद दरवाजा मेरे लिए खुलवाए ।। read more >>
खुदा कैसा सितम है ढाया मैने फिर अपनो को खाया ।। read more >>
दुआ मे सजदा तेरा कितया अपनो की आबादी का और तुने फिर लिखा किस्सा मेरी बर्बादी का ।। read more >>
थोड़ा कर्म फरमा मेरे मालका हर बार मिंजो मत सता मेरे दाता ।। read more >>
मुखजबानी थी कहानी मेरी , ऐसी थी नादानी मेरी ।। read more >>
सितम का इम्तिहान बहुत हुआ ऐसा ऐतबार फिर एक बार हमको हम सा हुआ read more >>
क्या लिखूं खुदा तेरी बसती पर हर बार लिखूं तुझ जैसी हस्ती पर ।। read more >>
क्या मांगा था और क्या मिला ऐसा खुदगरज जमाना हमको हर पल मिला ।। read more >>
अरे दिल के किसी कोने में आँसू है या पानी, ये कोई तो बताए मुझे! इस टूटते हुए रिश्ते में प्यार है या दिखावा, सच कोई तो समझाए मुझे! ​इस बेदर्� read more >>
तुमने ज़ख़्म दिए हैं जितने, सहकर भी बस प्यार किया, तुमने झूठे वादे तोड़े, हमने तो ऐतबार किया। ​छोड़ गए तुम बीच सफर में, रोते हुए इस पागल � read more >>
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