दुनिया की अधिकतर लड़ाइयों का एक ही कारण है - कुर्सी। राजा-महाराजाओं की जंग हो या आज के नेता का ट्वीट वार, मंज़िल सबकी एक ही है: वो गद्दी। � read more >>
वह दौर था 1951 का,
कल्याणबीघा के गाँव में जन्मे थे जी।
बचपन से सपना लिए थे,
सुधारेंगे बिहार को एक दिन जी।
किस्मत को कुछ और मंजूर था,
पहुँच� read more >>
अमृत कल हो चुका शुरू अब बारी नई हवाओं की है,
पूर्वजों से बनी बुनियाद अब बारी हम युवाओं की है,
यह सब है यहां बैठे हर युवा की भुजाओं पर,
तुम read more >>
बचपन से ही एक वाक्य सुनता आ रहा हूँ, "मजबूरी का नाम महात्मा गांधी" । जब भी कोई इंसान परिस्थितियों के आगे हार मान जाता है तो इस वाक्य को दो� read more >>