राजनीती-नवनीत

राजनीती-नवनीत

राजनीती ऐसा दलदल एक जिसमे जो गिरता है वो डूबता ही चला जाता है,
सारे रिश्ते नाते भूल कर इस दुनिया के बेटा बाप चाचा के विरुद्ध हो जाता है,
खेल कैसा खेलता है नेता इस भोली भाली जनता के साथ कुछ समझ ना आता है,
एक बार जीत जाये मि. इंडिया बन जाये 5 साल तक फिर नज़र ना आता है।
देश को जरूरत है पड़े लिखे नेताओ की काला अक्छर भैस बराबर नही चाहिए,
देश का विकास करे काम कुछ खास करे अपनी तिजोरी भरने वाला नही चाहिए,
दिल का वो सच्चा हो बात का भी पक्का ही खाली लम्बे भाषण देने वाला नही चाहिए,
एकता अखण्डता को देश में बनाये रखे मंदिर मस्जिद पे लड़वाने वाला नही चाहिए।

 

                   नवनीत

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