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संदेश जन-जन में-हेमा पांडे

मेरे देश में  ,हमारी जो संस्कृति है, हमारी संस्कृति और सभ्यता की वजह से भारतवर्ष एक सभ्य और संस्कार वान देश में गिना जाता है . पर इसी संस्कार वान  देश में आज जो अनैतिकता और फैशन के नाम पर हो रही बेशर्मी, शर्म से सर को झुका देने वाली सभ्यता बनती जा रही है. रिश्तो में आ रही दूरियां, अविश्वास ,खुलेआम सेक्स की आजादी, यह सब हमारे हिंदुस्तान पर एक कलंक की तरह बढ़ते जा रहे हैं. एक शादीशुदा औरत किसी से भी संबंध बना सकती है . ये  कानून पास करते समय उस जज को भी लाज नहीं आई होगी ,उस कानून की भी किताबें एक बार जरूर शर्मा गई होगी, हमारे देश की परंपरा यह थी अपने पति के साथ सती हो जाना, पति को परमेश्वर मान उसके साथ अपनी पूरी जिंदगी बिता देना, आज उसी देश का कानून फ्री सेक्स की आजादी दे रहा है. बदलते परिवेश के साथ साथ, हमारी मानसिकता ,हमारी सोच, हमारी संस्कृति भी बदल रही है. क्या यह सब बदलाव से हमारा देश पहले से ज्यादा सुखी है .पहले से ज्यादा आत्मनिर्भरता और विकसित है. यह जो कानून बनाए जा रहे हैं ,उससे कुछ ज्यादा फायदा होने वाला तो है नहीं ,पर हर रिश्ते में दूरियां नफरत और विश्वास ऐसा जरूर आ रहा है. आए दिन हो रहे घर में कलह , कलह के चलते बात विवाद बदलता माहौल, फिर जन्म लेगी वही सब, हत्याएं ,मर्डर आत्महत्या आए दिन कहीं ना कहीं ,यह घटना उठ रही है और उस घटना में अंदर जाकर झांके तो उसकी वजह भी यही है किसी की पत्नी पति को धोखा दे रही है तो इसकी वजह से हुआ ,किसी का पति पत्नी को धोखा दे रहा है तो उसकी वजह से. आप किसी भी घटना को लेकर देखिए, उसमें फ्री सेक्स, सेक्स का बढ़ता जुनून और सेक्स ,सेक्स ,सेक्स जरूर रहेगा. मैं कानून के ऊपर सवाल नहीं उठा रही ,पर कानून बनाने वाले, कानून पास करने वाले ,को जरूर सोचना चाहिए कि हम जहां हैं, उसकी संस्कृति और सभ्यता  यह नहीं है, जो आज लागू किए जा रहे हैं,

 

 

Hema Pandey     हेमा पांडे

 

 

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Hema Pandey

Hema Pandey

मैं हेमा पांडेय बाल साहित्यकार की कवित्री हूँ।

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