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Jyoti yadav
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@ jyoti-yadav
, Uttar Pradesh
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अच्छा लगा
नज़रों से देखा उनके तो नजराना अच्छा लगा दिलाएंगी चांद वो बहाना अच्छा लगा यकीन मानिए जब जब हंसी मां मेरी मुझे जमाना अच्छा लगा
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मैने शमा जलाया हवाओ मे रौशन खुदा कर गए
मैने शमा जलाया हवाओ मे रौशन खुदा कर गए खुशनसीबी मेरी हुई वो हमसे वफा कर गए मै चक्कर लगाती रही मन्दिर मस्जिद गिरजाघर मे और घर बैठ
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खुदा मेरे पापा से अच्छा होगा नही
यह तो सच है कि हमने खुदा को देखा नही पर वो मेरे पापा से अच्छा होगा नही पापा मेरे झलक है वो फलक है वो जन्नत है उन सा कोई सवारा नही ज�
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दिन ए मोहब्बत वतन पर जान वो अपनी लुटा गए
मंजर देशभक्ति का सरेआम वो दिखा गए हिन्द से मोहब्बत वो निभा गए दिन ए मोहब्बत वतन पर जान वो अपनी लुटा गए खुद चिता मे जलकर भारत मा के �
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हर रोज ढाती कहर जिन्दगी-सोचती हू फलक मिलेगा
सोचती हू फलक मिलेगा पर हर रोज ढाती है कहर जिन्दगी भेजती हू दुआ आसमानों मे हर दफा होती गई बेअसर जिन्दगी मै बांटती रही अमृत मुझे म�
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वो मेरे शंभूनाथ-भूल ना जाना घर मेरे आना
छोटे है कदम हमारे दुर आशियाना मैं रहती धरती पर तेरा चांद घराना मैंने भिजवाया बुलावा तुझको बाबा भूल ना जाना घर मेरे आना वो मेरे शंभून�
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हम तो मुसाफिर है अपने मंजिल के डगर की क्या बात
पागल है जिंदगी और मस्ताना ख्वाहिशात हम तो मुसाफिर है अपने मंजिल के डगर की क्या बात रुकना नहीं है बस चलना है कंकड़ हो या फूल सबसे म�
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आ रही हूं दर पे तेरे बाबा तुझे बुलाने को
आ रही हूं दर पे तेरे, बाबा तुझे बुलाने को स्वीकार लेना निमंत्रण मेरा भुल ना जाना आने को मैं तनुजा तेरी तुमसे है आस बड़ी खोलो नयन मेर�
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आसमान की रौनक पतंगो का त्योहार
आसमान की रौनक पतंगो का त्योहार गुलज़ार रहे सबका घर द्वार हैप्पी मकर संक्रांति ज्योति यादव के कलम से कोटिसा विक्रमपुर सैद�
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मैं पतंग तेरी तु बन जा डोर मेरी-उड़ा दे मुझे इन हवाओं में
मै पतंग तेरी तु बन जा डोर मेरी उड़ा दे मुझे इन हवाओं में सैर कर लूं गर्दिश की चांद को मांग लाऊं अपनी दुआओं में दुर होके हमें ललचाता है
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