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MD SHAYEED ALAM
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@ mahamamatha-saiitha-aalma
, Jharkhand
Indian Army
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मजा कुछ और है
अपने लिए तो जीते हैं सब, पर दूसरों के लिए जीने का मजा कुछ और है। अपनी जुबान से तो हंसते हैं सारे, पर दूसरों की हंसी बन जाने का मजा कुछ और
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अंत नहीं यह एक शुरुआत है
अंत नहीं यह एक नई शुरुआत है, अनादि से यही अंत का रिवाज है। बेशक एक राह का अंत हुआ है, पर आगे राह अनंत है अथाह है। जैसे सागर में धारा का न�
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मुनासिब नहीं
बेशक चांद तारे तोड़ लाना मुमकिन नहीं है, पर हम कोशिश ही ना करें यह मुनासिब नहीं है।।
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हम बच्चे ही अच्छे थे
बचपन ही अच्छा था, हम बच्चे ही अच्छे थे। झूठ, फरेब ,नफरत से दूर थे हम, मन के हम सच्चे थे।।
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ऐ जिंदगी और कितना थकाएगी
ऐ जिंदगी तू और मुझे कितना थकाएगी? कितने इम्तिहान लेगी मेरा मुझे कितना गिराएगी? तुझसे ज्यादा जिद्दी हूं मैं ऐ जिंदगी, हार नहीं मानूंग�
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हम वह इंसान हैं
हम वह इंसान है जनाब जिन्हें अक्सर लोग भुला दिया करते हैं, जब जरूरत हमसे आन पड़े तभी हमें याद किया करते हैं।।
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एक तराना हूं मैं।
गुनगुनाओगे तो एक तराना हूं मैं, कोई गुजरा हुआ जमाना हूं मैं, भूल जाओगे तो बस एक फसाना हूं मैं।।
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हसरतें अधूरी रही
हसरतें अधूरी रह गई, जिंदगी की दौड़ भाग में। यूं ही उम्र गुजर गई, सही मौके की तलाश में।। - मोहम्मद सईद आलम
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दुश्मन की शामत आई थी
दुश्मन की शामत आई थी, जो पहलगाम पे वार किया। निहत्थे लोगों का दुश्मन ने नरसंहार किया। बहनों का सिंदूर उजाड़ा, सबका कत्लेआम किया। भो�
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बचपन मुझे याद आता है
बचपन के खेल खिलौने याद आते हैं, बचपन के दोस्त साथी याद आते हैं। बस एक छोटी सी दुनिया थी हमारी, निस्वार्थ बेमतलब थी अपनी यारी। धर्म जा�
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