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MD SHAYEED ALAM

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My Articles

अपने लिए तो जीते हैं सब, पर दूसरों के लिए जीने का मजा कुछ और है। अपनी जुबान से तो हंसते हैं सारे, पर दूसरों की हंसी बन जाने का मजा कुछ और read more >>
अंत नहीं यह एक नई शुरुआत है, अनादि से यही अंत का रिवाज है। बेशक एक राह का अंत हुआ है, पर आगे राह अनंत है अथाह है। जैसे सागर में धारा का न� read more >>
बेशक चांद तारे तोड़ लाना मुमकिन नहीं है, पर हम कोशिश ही ना करें यह मुनासिब नहीं है।। read more >>
बचपन ही अच्छा था, हम बच्चे ही अच्छे थे। झूठ, फरेब ,नफरत से दूर थे हम, मन के हम सच्चे थे।। read more >>
ऐ जिंदगी तू और मुझे कितना थकाएगी? कितने इम्तिहान लेगी मेरा मुझे कितना गिराएगी? तुझसे ज्यादा जिद्दी हूं मैं ऐ जिंदगी, हार नहीं मानूंग� read more >>
हम वह इंसान है जनाब जिन्हें अक्सर लोग भुला दिया करते हैं, जब जरूरत हमसे आन पड़े तभी हमें याद किया करते हैं।। read more >>
गुनगुनाओगे तो एक तराना हूं मैं, कोई गुजरा हुआ जमाना हूं मैं, भूल जाओगे तो बस एक फसाना हूं मैं।। read more >>
हसरतें अधूरी रह गई, जिंदगी की दौड़ भाग में। यूं ही उम्र गुजर गई, सही मौके की तलाश में।। - मोहम्मद सईद आलम read more >>
दुश्मन की शामत आई थी, जो पहलगाम पे वार किया। निहत्थे लोगों का दुश्मन ने नरसंहार किया। बहनों का सिंदूर उजाड़ा, सबका कत्लेआम किया। भो� read more >>
बचपन के खेल खिलौने याद आते हैं, बचपन के दोस्त साथी याद आते हैं। बस एक छोटी सी दुनिया थी हमारी, निस्वार्थ बेमतलब थी अपनी यारी। धर्म जा� read more >>
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