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MD SHAYEED ALAM
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MD SHAYEED ALAM
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@ mahamamatha-saiitha-aalma
, Jharkhand
Indian Army
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हम वह इंसान हैं
हम वह इंसान है जनाब जिन्हें अक्सर लोग भुला दिया करते हैं, जब जरूरत हमसे आन पड़े तभी हमें याद किया करते हैं।।
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एक तराना हूं मैं।
गुनगुनाओगे तो एक तराना हूं मैं, कोई गुजरा हुआ जमाना हूं मैं, भूल जाओगे तो बस एक फसाना हूं मैं।।
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हसरतें अधूरी रही
हसरतें अधूरी रह गई, जिंदगी की दौड़ भाग में। यूं ही उम्र गुजर गई, सही मौके की तलाश में।। - मोहम्मद सईद आलम
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दुश्मन की शामत आई थी
दुश्मन की शामत आई थी, जो पहलगाम पे वार किया। निहत्थे लोगों का दुश्मन ने नरसंहार किया। बहनों का सिंदूर उजाड़ा, सबका कत्लेआम किया। भो�
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बचपन मुझे याद आता है
बचपन के खेल खिलौने याद आते हैं, बचपन के दोस्त साथी याद आते हैं। बस एक छोटी सी दुनिया थी हमारी, निस्वार्थ बेमतलब थी अपनी यारी। धर्म जा�
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खुद से बातें करना अच्छा लगता है
कभी-कभी खुद से बातें करना अच्छा लगता है, तन्हा राहों पर अकेला चलना अच्छा लगता है। जिंदगी की भाग दौड़ में खुद को इस कदर भूल चुका हूं मैं,
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शिकायतें बहुत थी हमें भी
शिकायतें हमें भी बहुत थी अपने रब से, पर माजूर मजलूमों को भी, तेरा शुक्र अदा करते देखा है जब से, शर्मिंदा बहुत हूं मैं अपने रब से, या रब श
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उम्मीद की कश्ती
उम्मीद की कश्ती में सवार, दुनिया के समंदर में निकला हूं मैं। हर तरफ लगा है मेला, फिर भी तन्हा अकेला हूं मैं। परवाह नहीं मुझे, मंजिल म�
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बहाने बहुत हैं
बहाने बहुत हैं अपनी नाकामी छुपाने को, माचिस की एक तीली काफी है पूरा जहां जलाने को, अपने अंदर की चिंगारी को बुझने मत दो यारो, उम्मीद की
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हर को अपनी स्वीकार करो
हार को अपनी करो स्वीकार, हार का ना करो कभी तिरस्कार। हार ही तो जीत की कुंजी है, हार ही जीत की पहली सीढ़ी है। जब दिल से आए यह पुकार, हार �
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