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Nihal singh

Nihal singh

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@ nihal-singh-singh
, Rajasthan

“अलफ़्ज़ों से हालात का सामना करता हूँ।”

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My Articles

ख्वाब के पार : हक़ीक़त (भाग – 3) आज रविवार का दिन था, फिर भी आदि आज जल्दी उठ गया। उसे स्कूल नहीं जाना था, लेकिन वह रोज़ की तरह तैयार हुआ� read more >>
आज यमलोक में असामान्य चहल-पहल थी। इस हलचल का कारण यमदूतों द्वारा लाई गई दो आत्माएँ थीं—एक माँ और उसकी बेटी। दोनों की आत्माओं से ऐसी उ� read more >>
ख्वाब के पार : हक़ीक़त (भाग – 2) सूर्य अस्ताचल की ओर झुक रहा था। शाम की हल्की ठंडक के बीच, आदि पार्क की एक बेंच पर अपने दोस्त उदय के साथ ब� read more >>
अब तक ज़ेहन-ओ-दिल में यही पैकार रहा है जला है जो घर, उसमें कोई ग़द्दार रहा है वो जो कहते थे ये ज़मीं माँ है हमारी शायद वही इस देश का गु� read more >>
ख्वाब के पार : हक़ीक़त (भाग – 1) विकल्प अभी स्कूल में पढ़ता है। उसे पढ़ाई से कोई परहेज़ नहीं, पर उसकी रुचि का केंद्र एक ही विषय है— हिन्द� read more >>
अब ये बात कहने की नहीं लगती वो बेवफ़ा है मगर हमें नहीं लगती उसके साथ की है छाँव इस क़दर कोई गर्म हवा भी अब नहीं लगती उस्ताद अव्वल थे भ� read more >>
मिज़ाज था तल्ख़ पर उससे आहिस्ता कहना पड़ा मैं था मुज़फ़्फ़र मगर ख़ुद को सिकस्ता कहना पड़ा मैंने किया था दावा ताउम्र साथ रहने का इ� read more >>
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