शराफत को ,
जेब मे, रख के ,थोडे़ से क्या ?
हमने, नरम , लहजे मैं बात कर ली ।
अन्दाज़ ,बदल गए ।
शहर के , निकम्मों के भी
जो कभी हमें हुँजूर कह के
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ख्यालो मे ,
वो बाते ,करती है । खुब
....हूँ...ह ...हूँ !
सामने आए , नजर चुरा के चलती है।
वला..... बहुत ...खुब
हाय! वला ...! !...2
वो दिवानी , मै ,महबूब.....
हाय ! read more >>
हुँ ,मे गीत इश्क का,
थोड़ा ,गुनगुना देख
मिटा हूँ म।
चाहतो पे.... आजमा
के देख.....
हुँ मे सफर दीवानगी का
मुझे.....
हम-सफर बना के देख।
राहो मे त� read more >>