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Ritvik Singh

Ritvik Singh

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@ ritvik-singh
, Uttar Pradesh

एक हकीम शहर में ऐसा भी है ! जो सारे अमर की दवा कलम बताता है ....

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My Articles

क्यूँकि थोड़ा सा उदास हूँ मै ज़िंदगी की छोटी आश हूँ मै आग पे पड़ती बरसात हूँ मै तेरे झूठे जज़्बात हूँ मै अपनी कलम की स्याही हूँ मै ज़म read more >>
मै ख़ामख़ा तुझसे उमीद लगाये बैठा हूँ दिल की इस बँजर ज़मीन पे तेरे प्यार के निशान छिपाये बैठा हूँ कभी तेरा इंतज़ार तो कभी तेरी एक झलक � read more >>
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